IMD April Mausam Update: उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में एक बार फिर कुदरत का कड़ा इम्तिहान शुरू होने वाला है। पिछले कुछ दिनों की तपिश के बाद अब आसमान में बादलों का डेरा है और धूल भरी आंधियों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा भविष्यवाणियों के अनुसार, 3 से 5 अप्रैल 2026 के बीच एक बेहद शक्तिशाली 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) उत्तर-पश्चिम भारत में दस्तक देने जा रहा है, जिससे मैदानी इलाकों में आंधी-बारिश और पहाड़ों पर भारी बर्फबारी के आसार हैं।
अप्रैल का पहला सप्ताह भी बारिश-ओलों के नाम
अप्रैल की शुरुआत में मानसून जैसा नजारा (April Weather Alert)
आमतौर पर अप्रैल का महीना चिलचिलाती धूप और लू (Heatwave) के लिए जाना जाता है, लेकिन इस साल का परिदृश्य कुछ अलग ही नजर आ रहा है। भूमध्य सागर से उठे एक्स्ट्रा-ट्रॉपिकल स्टॉर्म यानी पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के राज्यों में मौसम बेहद अनिश्चित बना हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस सिस्टम का सबसे ज्यादा असर गुजरात और राजस्थान की सीमाओं के करीब दिखेगा, जहां से यह बढ़ता हुआ पूरे उत्तर-पश्चिम भारत को अपनी चपेट में ले लेगा। इसके असर से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।
ओलावृष्टि और गिरता तापमान: खेती पर संकट (Agromet Advisory)
आने वाले तीन दिनों में मौसम का सबसे आक्रामक रूप ओलावृष्टि (Hailstorm) के रूप में सामने आ सकता है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ इलाकों में छिटपुट ओलों की आशंका है, जो रबी की फसलों, विशेषकर पकने के करीब खड़ी गेहूं की फसल के लिए चिंता का सबब बन सकती है। बारिश और आंधी के गुजरने के बाद तापमान में बड़ी गिरावट आएगी, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ और दिनों की राहत मिलेगी। हालांकि, अप्रैल के दौरान बादलों की आवाजाही के कारण रात का तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है।
पहाड़ों पर बर्फबारी और दक्षिण में गर्मी की लहर (Jammu Kashmir, Himachal Weather)
जहां एक ओर मैदानी इलाकों में धूल और बारिश का दौर है, वहीं जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। इसके विपरीत, देश के पूर्वी और दक्षिणी तटों, जैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गर्मी का प्रकोप बढ़ने वाला है। यहां अप्रैल से जून के बीच सामान्य से अधिक 'हीटवेव डेज' रहने की संभावना है। यानी एक तरफ उत्तर भारत बारिश से भीग रहा होगा, वहीं दक्षिण और पूर्व भारत भीषण लू की चपेट में रहने वाला है।
अल नीनो और जलवायु परिवर्तन का संकेत (El Nino in June)
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल जून तक 'अल नीनो' (El Nino) की स्थिति तटस्थ रहने की 82 प्रतिशत संभावना है, लेकिन जून के बाद इसके दोबारा उभरने का खतरा मंडरा रहा है। 'सुपर अल नीनो' की आहट ने दुनियाभर के विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि इसका सीधा असर मानसून की बारिश पर पड़ता है। ये गर्मी बढ़ने की ओर इशारा करता है। अप्रैल के महीने में बार-बार आने वाले ये पश्चिमी विक्षोभ और बेमौसम बदलाव कहीं न कहीं जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की ओर भी इशारा कर रहे हैं, जो मानवीय गतिविधियों के कारण पर्यावरण में हो रहे बदलावों का नतीजा हैं।
