Electric buses in NCR: एनसीआर में शामिल यूपी के शहरों में जल्द ही इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने वाली हैं। यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) जल्द ही इन शहरों में 120 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी में है। इन बसों को खरीदने के लिए निगम ने 200 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। एनसीआर शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का यह कदम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के उस आदेश के अनुरूप है, जिसमें इन जिलों से डीजल बसों को धीरे-धीरे हटाने का निर्देश दिया गया है। इन शहरों में हर सर्दियों के मौसम में प्रदूषण चिंता का विषय बन जाता है।
एनसीआर शहरों में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें (सांकेतिक फोटो)
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यूपी के अन्य शहरों में चलेंगी डीजल बसें
सरकार के विशेष सचिव केपी सिंह ने हाल ही में परिवहन विभाग को पत्र लिखकर कहा कि इलेक्ट्रिक बसें नोएडा, गाजियाबाद समेत एनसीआर शहरों में चलेंगी, जबकि अन्य शहरों में डीजल बसें ही चलेंगी। पत्र में कहा गया है, "सर्दियों में वायु प्रदूषण के कारण एनसीआर शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाना जरूरी है। सीएक्यूएम के निर्देश के अनुसार संबंधित राज्यों में एनसीआर जिलों से शुरू होने वाली और दिल्ली जाने वाली सभी बसें या तो इलेक्ट्रिक होंगी या फिर सीएनजी या बीएस-VI डीजल होंगी। 30 जून 2026 तक एनसीआर से चलने वाली या टर्मिनेट होने वाली सभी बसें केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन मोड पर चलने वाली होंगी।"
नोएडा-ग्रेनो डिपो से चलती हैं रोजाना 300 रोडवेज बसें
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के डिपो से रोजाना करीब 300 रोडवेज बसें चलती हैं। ये बसें एनसीआर शहरों को यूपी के अन्य शहरों से जोड़ती हैं। इनमें से कुछ बसें दिल्ली के सराय काले खां, कश्मीरी गेट और आनंद विहार के डिपो में भी जाती हैं। वहीं गाजियाबाद में कौशांबी, लोनी और साहिबाबाद के डिपो से करीब 700 यूपीएसआरटीसी बसें चलती हैं, जो यूपी के अलग-अलग जिलों में जाती हैं। ये सभी सरकारी बसें फिलहाल सीएनजी से चलती हैं।
सरकार से विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार
नोएडा में यूपीएसआरटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि एनसीआर शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव है, लेकिन इसको लेकर सरकार की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश का मिलने का इंतजार है। उन्होंने कहा, "हमें इस संबंध में कोई विशेष निर्देश नहीं मिला है। दिशा-निर्देश मिलने के बाद हम प्रक्रिया को आसान बना देंगे।" इस बीच सीएक्यूएम ने दावा किया है कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में होने वाले वायु प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का भी अहम योगदान होता है। हाल ही में जारी इसके एक निर्देश के अनुसार, राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 30 जून, 2028 तक बड़ी संख्या में बसें केवल बिजली से चले।
