Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे पर विमानों को उतारने की अनुमति मिल गई है। नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरपोर्ट पर चार दिनों तक चली आईएलएल जांच के सफल होने पर अपनी स्वीकृति दे दी है। अब 15 नवंबर से लगातार एक महीने तक एयरपोर्ट के रनवे की टेस्टिंग के लिए एयरक्राफ्ट समेत व्यावसायिक विमानों को उतार कर जांच को और पुख्ता किया जाएगा।
नायल के अधिकारी ने बताया कि एयरपोर्ट पर कैट-1 और कैट-3 उपकरण स्थापित हो चुके हैं, जो कोहरे में विमान की ऊंचाई और दृश्यता की जानकारी देते हैं। डीजीसीए ने उपकरणों का निरीक्षण भी किया। एयरपोर्ट पर 10 से 14 अक्टूबर तक भारतीय विमानन पत्तन प्राधिकरण (एएआई) के एयरक्राफ्ट बीच किंग एयर 360 ईआर ने दिन में कई बार उड़ान भरकर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और प्रिसिजन अप्रोच पाथ इंडिकेटर (पीएपीआई) की जांच की।
रडार संबंधी उपकरणों की भी हुई जांच
उड़ान के दौरान जांच के समय सभी नेविगेशन और रडार संबंधी उपकरण ठीक से काम करते मिले। आईएलएस एक रेडियो नेविगेशन सिस्टम है, जो विशेष रूप से कम दृश्यता की स्थिति में दृष्टिकोण और लैंडिंग के दौरान पायलट को सही जानकारी देता है। इस प्रणाली में दो मुख्य घटक होते हैं, जिनमें लोकलाइजर और ग्लाइड पाथ एंटीना शामिल हैं। यह सुरक्षा प्रणाली पायलटों को कोहरे और बारिश के कारण दृश्यता काफी कम होने पर भी सुरक्षित रूप से उतरने में सक्षम बनाती है। आईएलएस सिस्टम के सफल होने पर प्रमाणपत्र जारी किया है।
पर 17 अप्रैल को कॉमर्शियल उड़ानें शुरू करने के लिए 90 दिन पहले सभी प्रकार के लाइसेंस लेना आवश्यक है। यदि तय समय में लाइसेंस प्राप्त नहीं होते हैं तो उड़ान में छह माह तक देरी संभव है। ऐसे में आईएलएस सिस्टम की जांच कर रिपोर्ट डीजीसीए को भेजी गई थी। रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की खराबी या आपत्ति न होने के बाद कंपनी को विमान रनवे पर उतारने के लिए प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है।
