मुंबई 26/11 का आतंकी हमला : पीड़ितों की मांग, तहव्वुर राणा को मिले मौत की सजा

  • Edited by: अमित कुमार मंडल
  • Updated May 18, 2023, 06:07 PM IST

कैलिफोर्निया स्थित एक अमेरिकी अदालत ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मामले में वांछित पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की अनुमति दे दी है।

Tahawwur Rana: मुंबई में 26/11 के आतंकी हमलों में घायल हुई दो महिलाओं ने आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण के लिए अमेरिकी अदालत द्वारा बृहस्पतिवार को दी गई मंजूरी का स्वागत किया और कहा कि उसे मौत की सजा या कठोर सजा दी जानी चाहिए। 2008 के आतंकी हमले में मारे गए एक पुलिसकर्मी के पिता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राणा के प्रत्यर्पण और उसकी गवाही से घटना में पाकिस्तान की भूमिका का पर्दाफाश हो जाएगा। राणा फिलहाल लॉस एंजिलिस की फेडरल जेल में बंद है।

Tahawwur Rana

तहव्वुर राणा

कुल 166 लोग मारे गए थे

नवंबर 2008 में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के हमलों के दौरान छह अमेरिकियों सहित कुल 166 लोग मारे गए थे। कैलिफोर्निया स्थित एक अमेरिकी अदालत ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मामले में वांछित पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारत के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। कैलिफोर्निया की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की अमेरिकी मजिस्ट्रेट न्यायाधीश जैकलीन चोलजियान ने बुधवार को 48 पन्नों का आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत राणा (68) को भारत प्रत्यर्पित करना चाहिए।

26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले की सबसे कम उम्र की चश्मदीद गवाह होने का दावा करने वाली देविका नटवरलाल ने कहा कि राणा को भारत लाने और उसे जेल में रखने से कुछ नहीं होगा बल्कि उससे (आतंकी हमलों के बारे में) अधिक जानकारी इकट्ठा की जानी चाहिए। मुंबई में हुए इन हमलों के दौरान देविका मात्र नौ साल की थीं। देविका (24) ने कहा कि हमले के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर, उनके दाहिने पैर में गोली लगी थी और उनके सामने कई लोग मारे गए थे। घटना को याद करते हुए देविका ने कहा, आतंकी हमले में मुझे गोली लगी थी। मेरे सामने कई लोग मारे गए। मुझे पता चला है कि राणा को भारत लाया जाएगा। मैं खुश हूं, लेकिन मुझे ज्यादा खुशी तब होगी जब उसे फांसी दी जाएगी या उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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