'देर आए, दुरुस्त आए' ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी। देश में तमाम सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। देश में ज्यादातर योजनाएं समय पर पूरी नहीं होती हैं, लेकिन जब होती हैं तो जनता को बड़ा फायदा और सहूलियत मिलती है। ऐसी ही एक सड़क परियोजना दो बार डेडलाइन मिस करने के बाद आज आम जनता के लिए खोल दी गई है। इससे लोग खुश हैं और उम्मीद है कि अब उनका सफर तेजी के साथ सुरक्षित भी होगा। चलिए जानते हैं -
मोहाली ग्रीनफील्ड रोड प्रोजेक्ट (NHAI फाइल फोटो)
कहां की सड़क परियोजना है ये
जिस सड़क परियोजना की हम बात कर रहे हैं, वह मोहाली की बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है। यह सड़क परियोजना महज 31 किलोमीटर लंबी है और पूरी तरह से ग्रीनफील्ड है। इस सड़क परियोजना को भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया गया है। सड़क शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास मौजूद आईटी चौक (PR-7) को कुराली–चंडीगढ़ रोड से जोड़ती है। मोहाली के बाहरी इलाकों से गुजरने वाली इस सड़क का निर्माण महाराष्ट्र की एक कंपनी ने किया है, जिसे अक्टूबर 2022 में ठेका दिया गया था।
किन इलाकों को होगा फायदा
यह परियोजना कई महीनों की देरी का बाद आखिरकार पूरी हुई है और अब आम जनता के लिए खोली गई है। आज यानी सोमवार 22 दिसंबर को इस सड़क परियोजना को आम जनता के लिए खोल दिया गया है। इस सड़क के खुल जाने से एयरपोर्ट रोड और आसपास के इलाकों में लंबे समय से ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।\
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1 दिसंबर को भी टला था उद्घाटन
दरअसल यहां एयरपोर्ट रोड पर ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को कम करने और दिल्ली से हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर की तरफ जाने वालों को वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराने के लिए इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। इस परियोजना का काम इसी साल जून और सितंबर में पूरा हो जाना था, लेकिन परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पायी। इसके बाद 1 दिसंबर को सड़क को आम लोगों के लिए खोला जाना था, लेकिन टोल प्लाजा के पास एंट्री-एग्जिट रोड की मांग को लेकर यहां के जमीन मालिकों और किसान संगठनों ने भारी विरोध किया। इस विरोध के चलते इसे एक बार फिर टालना पड़ा था। बाद में NHAI ने उनकी मांगें मान लीं और मामला सुलझ गया।
1400 करोड़ में तैयार हुई परियोजना
NHAI के अनुसार, इस ग्रीनफील्ड सड़क मार्ग पर सिर्फ एक ही टोल प्लाजा है। हालांकि, फिलहाल वहां टोल वसूली शुरू नहीं होगी, क्योंकि अभी तक टोल दरें तय नहीं हो पायी हैं। बता दें कि यह परियोजना तब अस्तित्व में आई जब जुलाई 2019 में ज्यादा लागत के चलते 40 किलोमीटर लंबे खरड़–बनूर–टेपला रोड प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया था। इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का कुल अनुमानित खर्च 1400 करोड़ रुपये है, जिसमें से 700 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण और 700 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पर खर्च किए गए हैं।
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मुआवजे के कारण अटका रहा काम
यह सड़क केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और मोहाली के लिए लाइफलाइन साबित होगी। इससे न सिर्फ ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू की ओर जाने वाले यात्रियों को भी लुधियाना होकर घूमकर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इस परियोजना को पहले भी कई अड़चनों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2021 में मुआवजे को लेकर जमीन मालिकों के विरोध के कारण निर्माण कार्य आठ महीने तक बंद रहा था। बाद में NHAI ने मुआवजे में चार गुना बढ़ोतरी को मंजूरी दी। जहां पहले प्रति एकड़ ₹24 लाख से ₹4.18 करोड़ तक मुआवजा तय था, वहीं अब कुछ जमीन मालिकों को 1 करोड़ से 1.09 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक भुगतान किया जा रहा है।
