महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य के 75 प्रतिशत हिस्से में सूखा घोषित किए जाने के बावजूद, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को स्पष्ट किया कि किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी।बावनकुले ने कहा कि नुकसान के आकलन की पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि कोई भी प्रभावित किसान छूट न जाए या उसे गलत मुआवजा न मिले।
प्रतीकात्मक फोटो
सूखा राहत के लिए हाल ही में बनी कैबिनेट सब-कमेटी के प्रमुख बावनकुले ने बताया कि जमीनी हकीकत की पूरी रिपोर्ट के बिना जल्दबाजी में दी गई आर्थिक मदद से आखिर में किसानों का ही नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि हमारा मकसद यह पक्का करना है कि कोई भी पात्र किसान छूट न जाए। कपास, सोयाबीन, हल्दी, गन्ना, बागवानी और संतरे के बाग जैसी अलग-अलग फसलों के नुकसान के पैमाने भी अलग-अलग होते हैं। जमीनी आकलन के बिना आज फंड जारी करने से गलत मुआवजा मिल सकता है। पूरी रिपोर्ट जरूरी है और इनके तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आधिकारिक तौर पर आर्थिक पैकेज की घोषणा करेंगे।
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प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कैबिनेट सब कमेटी प्रभावित जिलों में बदलती स्थिति की समीक्षा करने के लिए हर मंगलवार को बैठक करेगी। बावनकुले ने कहा कि नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड के नियमों के तहत फंड पाने के लिए जमीनी स्तर पर सटीक जांच बहुत जरूरी है।
'सरकार को ऐसे 2,000 से ज्यादा पत्र मिले हैं'
एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत विपक्ष के नेताओं के तत्काल सूखा राहत की मांग वाले पत्रों का जवाब देते हुए बावनकुले ने कहा कि सरकार को ऐसे 2,000 से ज्यादा पत्र मिले हैं।उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता पत्र लिखकर सिर्फ अपना फर्ज निभा रहे हैं, लेकिन हमारी सरकार सिर्फ उनकी वजह से काम नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्थिति का आकलन करने के लिए खुद खेतों का दौरा किया है। सूखा प्रभावितों की सूची से छूटे तालुकों का भी पूरी जांच के बाद मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने राजनीतिक दलों से संकट का राजनीतिकरण न करने और राहत कार्यों में योगदान देने की अपील की।
बावनकुले ने विपक्ष पर नकारात्मकता फैलाने का आरोप लगाया
वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर बावनकुले ने विपक्ष पर नकारात्मकता फैलाने का आरोप लगाया।उन्होंने पूछा कि ईवीएम पर बेबुनियाद शक जताने के बाद, अब वे एसआईआर प्रक्रिया को निशाना बना रहे हैं। सही वोटर लिस्ट सुनिश्चित करने में क्या गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल बूथ स्तर पर काम करने में नाकाम रहते हैं और इसके बजाय झूठी बातों पर भरोसा करते हैं। हाल के चुनावों में मतदाताओं ने गलत जानकारी को नकार दिया, जिसके परिणामस्वरूप सत्ताधारी गठबंधन को जनता का जबरदस्त समर्थन मिला।
