Harsha Richhariya: महाकुंभ के दौरान चर्चा में आईं पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने अब सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास का मार्ग अपना लिया है। रविवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने उन्हें विधि-विधान के साथ संन्यास की दीक्षा दी। दीक्षा के बाद परंपरा के अनुसार उनका नया नाम रखा गया है और अब वे ‘हर्षानंद गिरि’ के रूप में जानी जाएंगी।
हर्षा रिछारिया ने लिया संन्यास (फोटो- वीडियो ग्रैब: Twitter - Chaudhary Sanjeev Singh)
तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करके लिया संन्यास
रविवार को उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में संन्यास परंपरा का पालन करते हुए हर्षा रिछारिया ने शिखा और दंड त्याग की प्रक्रिया पूरी की। इसके साथ ही उन्होंने तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे धार्मिक कर्मकांड संपन्न कर अपने पूर्व सांसारिक जीवन से पूर्णतः त्याग लिया और आध्यात्मिक मार्ग पर कदम रखा। सभी विधि-विधानों के पूर्ण होने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से संन्यास ग्रहण किया। इस अवसर पर आश्रम के संतों, भक्तों और उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।
हर्षानंद गिरि का नया नाम
संन्यास ग्रहण करने के बाद हर्षा रिछारिया को नया नाम 'हर्षानंद गिरि' प्रदान किया गया है। इस अवसर पर हर्षानंद गिरि (पूर्व नाम हर्षा रिछारिया) ने कहा कि यह उनके जीवन की एक नई शुरुआत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने गुरुदेव के मार्गदर्शन में संन्यास लिया है और संकल्प किया है कि वे अपना जीवन धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के लिए समर्पित करेंगी, साथ ही संन्यास की मर्यादाओं का सदैव पालन करेंगी।
अनुशासनपूर्ण और कठिन प्रक्रिया
वहीं महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने कहा कि संन्यास की दीक्षा अत्यंत अनुशासनपूर्ण और कठिन प्रक्रिया होती है। इसमें व्यक्ति को अपने पूर्व जीवन का पूर्ण त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग को अपनाना पड़ता है और उसी पर दृढ़ता से आगे बढ़ना होता है। उन्होंने सभी संन्यासियों से अपील की कि वे अपने आचरण से संन्यास की गरिमा को बनाए रखें और उसे कभी भी कलंकित न होने दें।
कौन हैं महाकुंभ में वायरल हुईं हर्षा रिछारिया?
हर्षा रिछारिया मूल रूप से मध्य प्रदेश के भोपाल की रहने वाली हैं और पेशे से मॉडल, एंकर व सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर रही हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 18 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, जहां वे नियमित रूप से धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर सामग्री साझा करती रही हैं। करीब दो वर्ष पहले उन्होंने निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज से दीक्षा ली थी और वर्तमान में उत्तराखंड में निवास कर रही हैं। 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान वे निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में संतों के साथ रथ पर सवार दिखाई दी थीं। पीले वस्त्र, रुद्राक्ष की माला और माथे पर तिलक के साथ उनकी यह छवि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिससे वे चर्चा का केंद्र बन गईं।
