Lucknow-Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड नेशनल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद से ही इसकी सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हैं। पिछले कुछ दिनों में कई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए, जिनमें एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क क्षतिग्रस्त होने या धंसने का दावा किया गया। इन वीडियो के सामने आने के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठने लगे।
13 जुलाई को हुआ था लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन
समाजवादी पार्टी ने लगाया था आरोप
मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी के एक नेता ने सड़क से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए एक्सप्रेसवे के धंसने का आरोप लगाया। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने संबंधित स्थान का निरीक्षण कराया और प्रभावित हिस्से की मरम्मत कराई। इसके कुछ समय बाद एक्सप्रेसवे के एक अन्य हिस्से का वीडियो सामने आया, जिसमें सड़क की स्थिति को लेकर फिर सवाल खड़े किए गए। इसके बाद भी अलग-अलग स्थानों से ऐसे वीडियो सामने आते रहे।
NHAI के क्षेत्रीय प्रबंधक गौतम विशाल क्या कहा?
वायरल दावों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए टाइम्स नाउ नवभारत ने NHAI के क्षेत्रीय प्रबंधक गौतम विशाल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में हुई तेज बारिश के कारण एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों की ऊपरी सतह प्रभावित हुई थी। हालांकि, इन स्थानों पर तत्काल जरूरी मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया। NHAI अधिकारी के मुताबिक, अब तक पूरे एक्सप्रेसवे में किसी भी तरह का स्ट्रक्चरल डिफेक्ट सामने नहीं आया है।
एक बड़े और पांच छोटे स्लिपेज के मामले सामने आए
गौतम विशाल ने आगे बताया कि निरीक्षण के दौरान एक बड़े और पांच छोटे स्लिपेज के मामले सामने आए थे। सभी प्रभावित हिस्सों को दुरुस्त कर दिया गया है। एक्सप्रेसवे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और विस्तृत जांच के लिए एक समिति का गठन भी किया गया है। NHAI ने एक्सप्रेसवे की स्पीड लिमिट को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को भी खारिज किया है। अधिकारियों के अनुसार, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अधिकतम निर्धारित गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा ही रहेगी। गति सीमा घटाए जाने की वायरल खबरों को NHAI ने भ्रामक बताया है।
बता दें कि 13 जुलाई 2026 को खुला 63 किलोमीटर लंबा छह-लेन मार्ग है, जो दोनों शहरों के बीच यात्रा समय को घटाकर 35 से 40 मिनट करता है। इसे ₹4,200 से ₹4,700 करोड़ की लागत से बनाया गया है।
