उत्तर प्रदेश में Lucknow Kanpur Expressway पर किलोमीटर 64 के पास धंसी सड़क की मरम्मत अब राजनीतिक विवाद का विषय बन गई है। मरम्मत के दौरान कच्चे पैचवर्क को तेजी से सुखाने के लिए यहां पंखे लगाए गए हैं। लगाए गए 10 पंखों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन तस्वीरों को अपने आधिकारिक X सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करते हुए भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, 'ये है भाजपाई तरक्की की नई हवा।'
Akhilesh Yadav के इस पोस्ट के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि हाल ही में शुरू हुए एक्सप्रेसवे पर मरम्मत की जरूरत पड़ना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी सार्वजनिक परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण के दावों की वास्तविकता अब सामने आ रही है।
सोशल मीडिया पर खूब आ रही प्रतिक्रियाएं
वायरल तस्वीरों में सड़क के मरम्मत किए गए हिस्से के आसपास एक कतार में 10 बड़े पंखे लगाए गए दिखाई दे रहे हैं। इन्हें कच्चे पैचवर्क को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई यूजर्स इसे सरकारी कार्यप्रणाली से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सामान्य तकनीकी प्रक्रिया बता रहे हैं।
'मानकों के अनुरूप ही काम किया जा रहा है'
दूसरी तरफ, संबंधित एजेंसियों का कहना है कि मरम्मत कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पैचवर्क को तय प्रक्रिया के तहत सुखाने के लिए औद्योगिक पंखों का इस्तेमाल किया गया है, ताकि सड़क जल्द सुरक्षित रूप से यातायात के लिए तैयार हो सके। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपनाई गई है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है।
कतार में लगे 10 पंखों पर बहस तेज
फिलहाल एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्से पर मरम्मत का काम जारी है। हालांकि, सड़क पर लगे 10 पंखों की तस्वीरों ने तकनीकी प्रक्रिया को राजनीतिक बहस में बदल दिया है। एक तरफ विपक्ष निर्माण गुणवत्ता और परियोजना की निगरानी पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर संबंधित एजेंसियां इसे मानक मरम्मत प्रक्रिया का हिस्सा बता रही हैं। ऐसे में अब इस पूरे मामले की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तेज हो गई है और एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में आ गई है।
