रेलवे भारत जैसे विशाल देश के लिए लाइफलाइन है। बात जब कोंकण रेलवे की होती है तो इसकी खूबसूरती का तो हर कोई कायल है। कोंकण रेलवे से सफर करने का सपना रेल यात्रा करने वाले ज्यादातर यात्रियों का होता है। कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRCL) ने अपने यात्रियों के लिए एक नई सेवा 'रो-रो कार सर्विस' की शुरुआत करने का फैसला किया है। चलिए जानते हैं सके बारे में विस्तार से -
कोंकण रेलवे में कारों के लिए रो-रो सर्विस शुरू हुई (फोटो - konkanrailway.com)
कोंकण रेलवे की यह सर्विस निजी कार मालिकों के लिए काफी सुविधाजनक साबित हो सकती है। आगामी 23 अगस्त से कोंकण रेलवे महाराष्ट्र में कोलाड और गोवा के वर्ना के बीच 'रोल-ऑन रोल-ऑफ' (Ro-Ro) सेवा शुरू की जा रही है। कोंकण रेलवे की इस रो-रो सर्विस के जरिए लोग अपनी कार को ट्रेन में लोड कराकर एक जगह से दूसरी जगह भेज सकेंगे।
26 साल पहले ट्रकों के लिए शुरू की सेवा
कोंकण रेलने ने साल 1999 में भारत में सामान लदे ट्रकों के लिए Ro-Ro सेवा की शुरुआत की थी। अब करीब 26 साल बद उसी मॉडल को कारों के लिए लागू किया जा रहा है। यह सेवा हर दूसरे दिन कोलाड और वर्ना से चलेगी, जो शाम 5 बजे रवाना होकर सुबह 5 बजे अपने गंतव्य पर पहुंचेगी। यात्री के लिए दोपहर 2 बजे तक स्टेशन पर चेक-इन करना अनिवार्य होगा।
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रो-रो सेवा के लिए कितना किराया लगेगा?
इस सेवा के लिए एक विशेष रैक तैयार किए गए हैं, जिनमें 40 कारें लोड की जा सकती हैं। हर वैगन पर दो कारें लोड होंगी। रो-रो सर्विस के लिए प्रति कार 7,875 रुपये (GST सहित) का शुल्क रखा गया है। बुकिंग के समय आपको ₹4,000 रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा और बाकी रकम यात्रा के दिन चुकानी होगी। साथ ही, एक कार के साथ अधिकतम तीन यात्री कोच में सफर कर सकते हैं। यात्री ₹935 में एसी सीट या ₹190 में सेकंड सीटिंग में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं।
शुरू हो गई बुकिंग
कोंकण रेलवे की यह रो-रो सेवा का लाभ लेने के लिए बुकिंग कल यानी सोमवार 21 जुलाई से बुकिंग शुरू हो गई है। आप 13 अगस्त तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से बुकिंग कर सकते हैं। ध्यान रहे कि अगर बुकिंग 16 से कम हुई तो सेवा रद्द कर दी जाएगी। ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रेशन की रूपी राशि आपको वापस मिल जाएगी।
जाम और प्रदूषण का इलाज
कोंकण रेलवे के अनुसार क्षेत्र में रोड जाम, ईंधन की बर्बादी और प्रदूषण कम करने के लिए यह सेवा शुरू की जा रही है। रो-रो सर्विस को गणपति उत्सव जैसे बड़े आयोजनों पर भी लागू करने की योजना है। क्योंकि उत्सवों के दौरान भारी भीड़ और खराब सड़कों की वजह से सड़क मार्ग से यात्रा करना मुश्किल हो जाता है।
