उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में कथित धर्मांतरण, उत्पीड़न और प्रेमजाल में फंसाने के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए KGMU के कुलसचिव को पत्र लिखकर सभी आरोपी डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा है। STF की इस रिपोर्ट में गांधी वार्ड, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग से जुड़े कई गंभीर मामलों का जिक्र किया गया है, जिससे चिकित्सा जगत और प्रशासनिक हलकों में सनसनी फैल गई है।
गांधी वार्ड से पैथोलॉजी तक फैला था कथित नेटवर्क (फाइल फोटो| Facebook/KGMU Lucknow)
महिला कर्मियों और डॉक्टरों को निशाना बनाने के आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, KGMU परिसर में सक्रिय इस कथित नेटवर्क पर महिला डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों को प्रेमजाल में फंसाने, शादी का झांसा देने, शारीरिक व मानसिक शोषण करने तथा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से गांधी वार्ड से जुड़े मामलों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। एक महिला नर्सिंग कर्मचारी को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक व मानसिक शोषण करने और धर्म परिवर्तन कराने के आरोप। एक अन्य महिला नर्सिंग कर्मचारी को प्रेमजाल में फंसाने और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के आरोप। दो नर्सिंग स्टाफ को प्रेमजाल में फंसाने, शादी का झांसा देने और शारीरिक शोषण करने के आरोप है।
STF रिपोर्ट में 12 मुख्य आरोपी चिह्नित
STF की रिपोर्ट में प्रत्यक्ष शोषण और नेटवर्क को संरक्षण देने वाले कुल 12 प्रमुख लोगों की संलिप्तता का दावा किया गया है, जिन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है। डॉ. रमीजउद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक सीनियर रेजिडेंट (पैथोलॉजी), मुख्य आरोपी के रूप में चिह्नित है। इसपर जूनियर महिला डॉक्टर को प्रताड़ित करने और अन्य हिंदू महिला डॉक्टरों को निशाना बनाने के आरोप हैं। नफिस और फुरकान नर्सिंग स्टाफ (गांधी वार्ड), डॉ. आदिल, रेजिडेंट डॉक्टर (गांधी वार्ड) और शफात अली खान - संविदा कर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर, इसपर युवती से छेड़छाड़ और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप।
रिपोर्ट में कुछ विभागों के वरिष्ठ प्रोफेसरों, फैकल्टी सदस्यों और प्रशासनिक कर्मियों पर इस पूरे नेटवर्क को वैचारिक और वित्तीय संरक्षण देने का भी आरोप लगाया गया है। प्रो. सुरेश बाबू (एचओडी, पैथोलॉजी), डॉ. सुगायरा कयूम (एडिशनल प्रोफेसर, पैथोलॉजी), डॉ. वाहिद अली (इंचार्ज बायोमीट्री लैब, पैथोलॉजी), प्रो. उस्मान कौसर (नेफ्रोलॉजिस्ट, मेडिसिन विभाग), डॉ. अहमद (असिस्टेंट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री), डॉ. कलीम (असिस्टेंट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री) और एस. ए. अब्बास (सेवानिवृत्त क्लर्क)। इसके अलावा, रिपोर्ट में 'इस्लामिक मेडिकोज' ग्रुप से जुड़े कुछ अन्य डॉक्टरों के नाम भी संदिग्धों और सहयोगियों के रूप में दर्ज किए गए हैं, जिनके तार बाहरी संगठनों से जुड़े होने की बात कही जा रही है।
शासन स्तर से सख्त कार्रवाई के निर्देश
चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी द्वारा केजीएमयू कुलसचिव को भेजे गए पत्र के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। शासन ने एसटीएफ रिपोर्ट में सामने आए सभी तथ्यों का संज्ञान लेते हुए नामजद और संदिग्ध आरोपियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा उसकी रिपोर्ट तलब की है। केजीएमयू प्रशासन इस संवेदनशील मामले में अब आगे की कानूनी और आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया तेज करने की तैयारी में है।
