72 घंटे में लुढ़केगा तापमान, 15 राज्यों में आंधी-पानी, वज्रपात; ओलावृष्टि-हीटवेव से करें बचाव

अगले 72 घंटों में कई राज्यों में खतरनाक मौसम का पूर्वानुमान जताया गया है। आईएमडी ने पश्चिम बंगाल, झारखंड समेत पूरे पूर्वोत्तर के राज्यों में तेज तूफान और भारी बारिश की चेतावनी जारी किया है। उधर, दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों में मौसमी गतिविधियां होने का अनुमान है। अगर, बात उत्तर भारत की करें तो अभी आंधी-पानी से भीषण गर्मी और लू से राहत रहेगी और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी भागों पर बारिश-बर्फबारी और ओलावृष्टि से मौसम बदला रहेगा।

मौसम के लिहाज से अगले कई दिन उलटफेर वाले साबित होने वाले हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण और पूर्वोत्तर समेत अधिकांश राज्यों में तापमान डाउन रहेगा और लू-भीषण गर्मी से राहत रहने वाली है। आईएमडी ने अगले 2 दिन के मौसम का अलर्ट जारी करते हुए पहाड़ों पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के बने रहने और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व कश्मीर के कुछ ऊंचे हिस्सों पर तेज हवाएं बहने, बारिश-बर्फबारी के साथ ओले गिरने की संभावना व्यक्त की है। इधर, समूचे उत्तरी भागों पर विक्षोभ का असर दिखाई दे सकता है। शनिवार-रविवार को भी हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के कई जिलों में धूल भरी आंधी के साथ झमाझम बारिश, ओलावृष्टि-आकाशीय बिजली गिरने का खतरा जताया गया है, जिससे 3 से 4 डिग्री सेल्सियस पारा गिर सकता है, जिससे अगले कई दिनों तक हीटवेव से छुटकारा मिलेगा। स्काईमेट ने मई के पहले सप्ताह में पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्यों में तूफानी हवाएं और भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है। उधर, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी तेज पानी बरसने की चेतावनी है। वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ जिलों को छोड़कर ज्यादातर सूखे और गर्मी का सामना करेंगे।

Mausam Aaj Kal

मौसम आज-कल

यूपी में कल मौसम कैसा रहेगा?

उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिन से हल्की मौसमी गतिविधियों के कारण तापमान में मामूली कमी देखी गई है, जिससे भीषण तपिश वाली गर्मी और लू से राहत मिली है। हालांकि, कहीं-कहीं तेज बारिश और तूफान व बिजली गिरने से भारी नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने 4 मई यानी 72 घंटे में एक बार फिर से राज्य में पश्चिमी विक्षोभ का असर तेज हो सकता है और अधिकांश जिलों में धूल भरी आंधी के साथ मूसलाधार बारिश, ओले गिरने और वज्रपात का खतरा बढ़ सकता है, जिससे अधिकतम तापमान 5 से 6 डिग्री सेल्सियस से कम की गिरावट हो सकती है, जिससे तपिश कम होगी। कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है।

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