झारखंड हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद छात्रों का गुस्सा एक बार फिर से फूट पड़ा है। 'JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच' के छात्र नेता पीयूष, रवींद्र पासवान और कुणाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर हेमंत सोरेन सरकार पर झारखंड के लाखों युवाओं और उनके अभिभावकों के साथ बड़ा छल करने का गंभीर आरोप लगाया है।
छात्र नेताओं ने बताया कि परीक्षाओं में हो रही व्यापक धांधली, पेपर लीक, परीक्षा माफियाओं के संरक्षण और जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) रद्द करने की मांग को लेकर वे पिछले 26 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर बैठे थे। इस लंबे संघर्ष के आगे झुकते हुए सरकार ने लगभग 22 परीक्षाओं को रद्द करने और सुधार का आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित कराया था। हालांकि, सीबीआई जांच की मांग पर सरकार के असमर्थता जताने के बाद छात्र न्यायिक जांच और 2 महीने के अल्टीमेटम पर सहमत हुए थे।
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सरकार पर जानबूझकर सही तथ्य पेश नहीं करने के लगाए आरोप
परंतु, आज अदालत में जो कुछ हुआ, उसने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार केवल आंदोलन को खत्म कराना चाहती थी। कोर्ट में मामले की पैरवी के दौरान सरकार की ओर से जानबूझकर सही तथ्य पेश नहीं किए गए, जिससे अदालत को फैसला सुनाने में सही स्थिति का पता नहीं चल सका। जेएसएससी-सीजीएल में पेपर लीक होने की बात छिपाकर उसे महज 'गेस क्वेश्चन' का रूप दिया गया, जिसके चलते हाई कोर्ट ने रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी।
सभी 24 जिलों में सीएम सोरेन का होगा पुतला दहन
छात्र संगठन ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार देते हुए घोषणा की है कि इसके विरोध में राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा। यदि सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता नहीं दिखाई और कोर्ट में पारदर्शी कदम नहीं उठाए तो 2 महीने का अल्टीमेटम पूरा होने से पहले ही राज्यव्यापी 'उलगुलान' (विद्रोह व व्यापक आंदोलन) शुरू कर दिया जाएगा।
