बचपन की 'बेड़ियों' से मिली आजादी, 12 साल में हुई थी शादी, अब कोर्ट ने किया रद्द; खुशबू की जीत बनी मिसाल

राजस्थान (जोधपुर) की एक साहसी बेटी ने 10 साल के लंबे इंतजार और कानूनी लड़ाई के बाद उस 'बाल विवाह' को खत्म कर दिया है, जो उसकी मर्जी के बिना तब हुआ था जब वह महज 12 साल की थी। आइए जानते हैं इसकी कहानी।

Jodhpur: राजस्थान की एक युवती (बदला हुआ नाम 'खुशबू') ने समाज की एक ऐसी कुप्रथा के खिलाफ जंग जीती है, जिसने उसके बचपन को निगल लिया था। जोधपुर के फैमिली कोर्ट के जज वरुण तलवार ने खुशबू की उस शादी को 'शून्य' (Annul) घोषित कर दिया, जो साल 2016 में तब हुई थी जब वह 12 साल की थी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बाल विवाह बच्चों के वर्तमान और भविष्य दोनों को प्रभावित करता है और इसे खत्म करने के लिए समाज को मिलकर कदम उठाने चाहिए।

Jodhpur child marriage annuled

10 साल बाद कोर्ट ने शादी को रद्द किया (AI Image)

खेलने की उम्र में हुई थी 'बड़ों की जिद'

बिश्नोई समुदाय से ताल्लुक रखने वाली खुशबू बताती हैं कि जब उसकी शादी तय हुई, उसे समझ ही नहीं था कि उसके चारों ओर क्या हो रहा है। समाज के बड़े-बुजुर्गों ने रीति-रिवाजों का हवाला देकर यह शादी तय कर दी थी। खुशबू के मुताबिक, "मेरे माता-पिता की भी इसमें बहुत कम चली थी।" यह शादी एक रस्म 'मौसर' (मृत्युभोज) के दौरान सामूहिक विवाह के रूप में हुई थी, जहां अक्सर परंपराओं को कानून से ऊपर रखा जाता है।

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