JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी तथा धांधली के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन देर रात भारी पुलिस और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी के बाद अचानक राजनीतिक व प्रशासनिक अखाड़े में तब्दील हो गया। रात के अंधेरे में स्टेडियम के आसपास सैकड़ों पुलिसकर्मियों की तैनाती और उपायुक्त (DC) और सिटी SP के पहुंचने से हड़कंप मच गया। हालांकि, जिला प्रशासन ने देर रात छात्रों को जबरन हटाने या हिरासत में लेने की खबरों का पूरी तरह खंडन किया है।
पत्रकारों से बात करते DC मंजूनाथ भजंत्री
'भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को मनाने की कोशिश की'
रांची के उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजंत्री और एडीएम धनंजय कुमार ने देर रात प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। DC मंजूनाथ भजंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि "हमने भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को कुछ खाने के लिए मनाने की कोशिश की ताकि उनकी सेहत पर बुरा असर न पड़े। हम आगे भी कोशिश करते रहेंगे।"
सिटी एसपी पारस राणा ने पुलिस कार्रवाई और हिरासत में लेने की खबरों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि हम किसी को हिरासत में लेने नहीं आए थे। इससे पहले हुई पत्थरबाजी की घटना को लेकर आंदोलन की कोर कमेटी के सदस्यों ने ही आशंका जताई थी कि कुछ असामाजिक तत्व विरोध को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी टीम सिर्फ उन संदिग्धों की पहचान करने आई थी ताकि कोई अपराधी भीड़ का फायदा न उठा सके।
बीजेपी नेताओं ने उठाए सवाल
प्रशासनिक टीम के स्टेडियम पहुंचते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रतिनिधिमंडल ने भी मौके पर पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया और सरकार पर तीखा हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि पुलिस इन छात्रों को हटाने के लिए रात में कोई ऑपरेशन करने की योजना बना रही है। DC और SSP आमतौर पर रात 12:30 बजे कभी नहीं आते। मौके पर आधे किलोमीटर के दायरे में 500 से 600 कॉन्स्टेबल तैनात हैं, जो उन पर लगातार नजर रख रहे हैं। ये छात्र अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।
बीजेपी विधायक राज सिन्हा ने कहा कि एक दिन पहले भी विधानसभा परिसर के बाहर स्ट्रीट लाइट्स बंद करके छात्रों और पत्रकारों पर लाठियां चलाई गईं। आज फिर बाहर की बत्तियां बंद कर दी गईं। अगर प्रशासन के पास बल और अधिकार है, तो जो करना है दिन के उजाले में खुलेआम करे, रात के अंधेरे में डराने की साजिश क्यों?
