झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली की जांच कर रही CID के हाथ कई चौंकाने वाली जानकारियां लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया और परीक्षा संचालन में बड़े पैमाने पर कमीशन खोरी व रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। CID के समक्ष दर्ज कराए गए बयानों में टीडीपीएल (TDPL) कंपनी को JSSC का काम दिलाने से लेकर मोटी रकम के लेन-देन तक के दावे किए गए हैं।
रांची में परीक्षाओं में धांधली की जांच के लिए हो रहा है आंदोलन (फाइल)
बायोमेट्रिक्स काम से शुरू हुआ विवाद
मामले में अभय तिवारी के अनुसार, TDPL कंपनी को सबसे पहले JSSC-CGL परीक्षा में अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक्स का काम सौंपा गया था। हालांकि, रेट कम होने का हवाला देते हुए कंपनी ने काम करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद JSSC ने कंपनी को डी-इंपैनल कर दिया। अभय तिवारी ने दावा किया कि इसके बाद उनका संपर्क एक वेब एजेंसी से हुआ, जिसने बोकारो में परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों और प्रश्न-उत्तर से संबंधित फर्जीवाड़े की जानकारी पहले ही साझा की थी।
टेंडर दिलाने के एवज में 10 फीसदी कमीशन की मांग
CID के समक्ष अपनी कथित स्वीकारोक्ति में समवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2013 में JSSC ने इंपैनलमेंट के लिए टेंडर निकाला था। इस टेंडर को दिलाने में अभय तिवारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। समवीर के मुताबिक, अभय तिवारी की स्थानीय स्तर पर कई वरिष्ठ अधिकारियों से अच्छी जान-पहचान थी। इसी रसूख के आधार पर टेंडर मिलने पर अभय तिवारी ने कुल रकम का 10 प्रतिशत कमीशन देने की शर्त रखी थी।
JSSC भवन के मैदान में दिए गए 5 लाख रुपये
समवीर सिंह ने कथित तौर पर यह भी खुलासा किया कि JSSC के तत्कालीन सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO) प्रेम कुमार से उनके नजदीकी संबंध थे। इसी संबंध का फायदा उठाकर TDPL कंपनी को JSSC की भर्ती प्रक्रिया के टेंडर में शामिल और इंपैनल कराया गया। बयान में दावा किया गया है कि इस सहयोग के बदले TDPL की ओर से 5 लाख रुपये और ASO प्रेम कुमार को भी 5 लाख रुपये दिए गए थे। यह रकम किसी दफ्तर में नहीं, बल्कि JSSC भवन के मैदान में दी गई थी।
क्या होती है 'एनक्लिलरी सर्विसेज' की भूमिका?
परीक्षा संचालन के दौरान एन्सिलरी सर्विसेज की भूमिका बेहद संवेदनशील होती है। इसके तहत परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों के पहचान पत्र और बायोमेट्रिक का सत्यापन, सुरक्षा जांच और CCTV कैमरों से निगरानी, गोपनीय प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से केंद्रों तक पहुंचाना और उत्तर पुस्तिकाओं को एकत्र करना, कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षाओं में सर्वर, कंप्यूटर और इंटरनेट की निर्बाध तकनीकी निगरानी रखना शामिल था। इन सेवाओं से जुड़ी कंपनियों पर मिलीभगत के आरोप लगने से पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
JPSC और JSSC परीक्षाओं की गहन जांच जारी
झारखंड में JPSC-14, JPSC-11-13 और JSSC-CGL जैसी बड़ी परीक्षाओं में धांधली की जांच सीआईडी (CID) द्वारा तेजी से की जा रही है। जांच एजेंसी संबंधित अधिकारियों और निजी कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी और पूछताछ कर रही है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर परीक्षा संचालन तक में शामिल सभी कंपनियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
