झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रहा युवाओं का गुस्सा अब कानूनी लड़ाई और पुलिसिया कार्रवाई का रूप ले चुका है। राजधानी रांची में पिछले 20 दिनों से लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। पिछले 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करने के मामले में पुलिस ने करीब 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
रांची विधानसभा घेराव मामला
दरअसल, राज्य में हुई भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हजारों अभ्यर्थी लंबे समय से सड़कों पर हैं। अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को विधानसभा की तरफ एक शांतिपूर्ण मार्च निकाला था। हालांकि, यह मार्च अचानक उग्र हो गया और स्थिति बिगड़ गई।
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पुलिस का क्या कहना है?
रांची के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 'विधानसभा पुलिस स्टेशन' में दर्ज किया गया है। रांची के एसपी पारस राणा ने बताया कि 10 अगस्त को शांतिपूर्ण मार्च को बाधित करने और नियमों को तोड़ने की वजह से यह कार्रवाई की गई है।
प्रदर्शनकारियों पर धारा 163 (निषेधाज्ञा) का उल्लंघन करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
वीडियो फुटेज से हो रही उपद्रवियों की पहचान
हटिया के एसडीपीओ (SDPO) नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि घटना के समय बनाए गए वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है। फुटेज के जरिए उन चेहरे और लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने भीड़ का फायदा उठाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
परीक्षा में पारदर्शिता और अपने भविष्य की मांग को लेकर रांची की सड़कों पर डटे छात्रों का यह आंदोलन दिन-ब-दिन और तीव्र होता जा रहा है, लेकिन दर्ज हुई FIR के बाद इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नया मोड़ ले लिया है।
