Jaipur Terror Case: राजस्थान की राजधानी जयपुर से सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों बल्कि आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba suspect) से जुड़ा आतंकी उमर हारिस (अमजद) उर्फ ‘खरगोश’ फर्जी दस्तावेजों के जरिए जयपुर में रहकर पासपोर्ट बनवाने और देश से फरार होने में सफल रहा।
पहचान छिपाकर एक साल तक जयपुर में रहा आतंकी
जांच में सामने आया है कि उमर हारिस ने जयपुर के जयसिंहपुरा खोर इलाके में करीब एक साल तक ‘सज्जाद’ नाम से पहचान छिपाकर निवास किया। वह दिल्ली रोड स्थित राशिद विहार कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहा था। जांच में पता चला है कि, उसकी दिनचर्या बेहद संदिग्ध थी, वह अधिकतर समय लैपटॉप पर बिताता था और केवल नमाज के लिए ही बाहर निकलता था।
सुनियोजित तरीके से तैयार किए फर्जी दस्तावेज
आतंकी ने भारत में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। जानकारी के अनुसार, हरियाणा के नूंह में एक मददगार की सहायता से पहले उसके नाम से आधार कार्ड बनवाया गया, जिसे बाद में ‘सज्जाद’ नाम से अपडेट कराया गया। इसी आधार के जरिए उसने वोटर आईडी भी हासिल की और फिर पासपोर्ट बनवाकर अगस्त 2024 में भारत से इंडोनेशिया होते हुए सऊदी अरब फरार हो गया।
मकान मालिक और स्थानीय नेटवर्क जांच के दायरे में
बताया जा रहा है कि आतंकी ने कम आवाजाही वाली कॉलोनी का चयन किया ताकि वह लंबे समय तक गुमनाम रह सके। उसने सद्दाम और आमिर हसन नामक भाइयों के मकान में मात्र 1500 रुपये महीने पर कमरा किराए पर लिया था। फिलहाल पुलिस मकान मालिकों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है।
संयुक्त कार्रवाई में चार संदिग्ध गिरफ्तार
इस पूरे मामले का खुलासा जम्मू-कश्मीर पुलिस की खुफिया सूचना के बाद हुआ। इसके बाद राजस्थान एटीएस ने एडिशनल डीजी दिनेश एम.एन. के नेतृत्व में 3 अप्रैल को जयपुर में दबिश दी। इस कार्रवाई में चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंपा गया है।
आतंकी नेटवर्क की तलाश जारी
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जयपुर में उमर हारिस की मदद करने वाले अन्य लोग कौन थे और वह लैपटॉप के जरिए किन आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।
