Bharatpur: भरतपुर के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जगवीर सिंह की कहानी आत्मविश्वास की मिसाल है। एक ऐसा डॉक्टर जो कभी मैराथन धावक और साइक्लिंग चैंपियन था, आज व्हीलचेयर पर बैठकर भी न सिर्फ ऑपरेशन कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रहा है।
खेलों को लेकर भी वैसा ही जुनून (सांकेतिक तस्वीर|Canva)
एक हादसा जिसने जीवन बदल दिया
27 नवंबर 2021 को पुणे में सहादरी क्लासिक साइक्लिंग रेस के दौरान डॉ. सिंह के साथ एक भीषण हादसा हो गया। अपहिल राइड पूरी करने के बाद जब वे डाउनहिल सेक्शन में थे, तब एक मोड़ पर उनकी साइकिल बिजली के पोल से टकरा गई। यह टक्कर इतनी गंभीर थी कि वे 17 दिन तक वेंटिलेटर पर रहे। इलाज के लिए अमेरिका तक जाना पड़ा, लेकिन रीढ़ की चोट इतनी गंभीर थी कि वे हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गए। डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि कमर से नीचे का हिस्सा कभी काम नहीं करेगा।
खेलों से नहीं तोड़ा रिश्ता
60 वर्ष की उम्र में डॉ. सिंह ने पहली बार इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया। बेंगलुरु में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने 5000 मीटर व्हीलचेयर रेस में गोल्ड मेडल, 800 मीटर और 100 मीटर व्हीलचेयर रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीते। एक समय जो व्यक्ति खुद को पूरी तरह फिट मानता था, वह अब अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर नई पहचान बना रहा है।
अब भी करते हैं सर्जरी
भरतपुर में एमजे हॉस्पिटल चलाने वाले डॉ. सिंह आज भी उसी समर्पण से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका से स्टैंडिंग व्हीलचेयर मंगवाई है, जिसकी मदद से वे जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक कर पा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने स्पोर्ट्स व्हीलचेयर भी मंगवाई है, जिसकी मदद से वे अब व्हीलचेयर रेसिंग, हैंड साइक्लिंग और स्वीमिंग जैसी प्रतियोगिताओं में भी भाग ले रहे हैं।
