Rajasthan Politics : हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में बहुमत से जीत हासिल करने के बाद अब कांग्रेस राजस्थान और मध्य प्रदेश में चुनाव की तैयारी कर रही है। हालांकि राजस्थान में दो गुटों में जबरदस्त टक्कर चल रही है जो कि चर्चा का विषय बनी हुई है। ये टक्कर है सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच, लेकिन इसी बीच कांग्रेस को बड़ा झटका मिल सकता है। चुनावी साल में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया ने कांग्रेस छोड़ने का मन बना लिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वे शुक्रवार सुबह 10:15 पर बीजेपी मुख्यालय पहुंचेंगे और शपथ लेंगे। इस दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के अलावा बड़ी तादात में सुभाष महरिया गुट के लोग मौजूद रहेंगे।
सुभाष महरिया। (Credit - @officeofmaharia)
परिवार में आकर हो रही खुशी
सुभाष महरिया ने गुरुवार को कहा है कि वे बीजेपी के कार्यकर्ता रहे हैं। फिर से परिवार में आकर बहुत प्रसन्न महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मैं पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर फिर से शामिल हो रहा हूं। ऐसे में पार्टी मुझे जो भी, जहां भी जिम्मेदारी देगी। मैं उसे अच्छे से निभाने की कोशिश करूंगा। बताया जा रहा है कि महरिया को भाजपा लक्ष्मणगढ़ विधानसभा सीट से गोविंद सिंह डोटासरा के सामने अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है।
सुभाष महरिया के प्रोफाइल के बारे में जानें
सुभाष महरिया का जन्म 29 सितंबर 1957 को हुआ था। सीकर स्थित एसके कॉलेज से उन्होंने बीए उत्तीर्ण किया है। महरिया पेशे से किसान, सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगपति हैं। वर्ष 1998, 1999 व 2004 में लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की थी। हालांकि 1996 के चुनाव में कांग्रेस के हरि सिंह के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद हुए चुनाव में उन्होंने हरी सिंह को कड़ी टक्कर देते हुए हरा दिया था। निरंतर तीन बार सांसद चुने जाने के बाद 2009 में वे हारे और तब 2014 में भाजपा उन्हें टिकट नहीं दिया था। इस बात से खासे नाराज हुए महरिया ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और 2019 में कांग्रेस से चुनाव लड़ा।
जाट नेता के रूप में है पहचान
सुभाष महरिया की पहचान एक जाट नेता के तौर पर है। वे बीजेपी के किसान मोर्चा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहने के साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। महरिया ने 2004 तक केंद्रीय राज्यमंत्री ग्रामीण विकास मंत्रालय में बतौर मंत्री कार्यभार संभाला। 2004 में पार्टी नेतृत्व ने इन्हें फिर लोकसभा के लिए चुना और 2010 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य निर्वाचित किया। इसके साथ ही पार्टी हाईकमान ने इन पर भरोसा जताते हुए इन्हें 2011 में बीजेपी किसान मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया था।
