Rajasthan: राजस्थान में परंपरा के नाम पर एक बड़ी घिनौनी घटना सामने आई है। एक परिवार, मृत्युभोज पर जब सामाज को मालपुए नहीं खिला सका तो पंचायत ने उसका हुक्का पानी ही बंद कर दिया, सामाजिक बहिष्कार कर दिया। इतना ही नहीं बाकी लोगों को भी हिदायत दी गई है, अगर किसी ने पीड़ित परिवार का साथ दिया, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
आर्थिक तंगी बनी 'गुनाह'
प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला सिरोही जिले के बरलूट थाना क्षेत्र के मांडवरिया गांव का है। यहां रहने वाले एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सदस्य सदर राम का बीती 5 जून को निधन हो गया था। इसके बाद 17 जून को परिवार ने मृत्युभोज का आयोजन किया। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिवार समाज की रूढ़िवादी परंपरा के अनुरूप घी के मालपुए नहीं बनवा सका और इसकी जगह मेहमानों के लिए सामान्य और सादे भोजन की व्यवस्था की। सादा खाना परोसे जाने से समुदाय के करीब एक दर्जन पंच इस कदर नाराज हो गए कि उन्होंने अगले ही दिन (18 जून) शोकाकुल परिवार और उनके समर्थन में आए 42 अन्य परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का 'तुगलकी फरमान' सुना दिया।
हुक्का-पानी बंद
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि इस फरमान के बाद गांव में उनका जीना दूभर हो गया है और उन्हें मूलभूत मानवाधिकारों से भी वंचित किया जा रहा है। गांव के दुकानदार इन परिवारों को राशन का सामान नहीं बेच रहे हैं। प्रभावित परिवारों को गांव के सार्वजनिक कुएं से पानी भरने की अनुमति नहीं दी जा रही है। स्थानीय खेत मालिकों ने इन परिवारों के लोगों को मजदूरी या काम पर रखना बंद कर दिया है। प्रभावित ग्रामीण तेजाराम ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "हमारे सामने स्थिति बहुत गंभीर हो गई है। हमें न तो राशन मिल रहा है और न ही कुएं से पानी भरने दिया जा रहा है।" वहीं एक अन्य पीड़ित गोपाल ने बताया कि समाज के डर और जुर्माने के खौफ से वे 20 जून को अपने एक करीबी रिश्तेदार की शादी में भी शामिल नहीं हो सके।
फरमान तोड़ने पर 11 हजार रुपये का जुर्माना
सामने आया है कि पंचायत के इस कथित फरमान में पूरे गांव को चेतावनी दी गई है कि जो भी व्यक्ति इन 43 परिवारों के साथ किसी भी तरह का संबंध रखेगा या इस बहिष्कार को तोड़ेगा, उस पर 11,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, उसे दंड के रूप में पूरे समाज को अलग से भोज भी कराना होगा।
न्याय के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ित
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने वारदात के तुरंत बाद 20 जून को ही बरलूट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद थक-हारकर गुरुवार को सभी 43 परिवारों के सदस्य इंसाफ की मांग को लेकर सिरोही के जिला कलेक्टर से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा। सिरोही के जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह ने बताया कि प्रभावित परिवारों का ज्ञापन मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को तुरंत आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। वहीं, बरलूट थाने के सहायक उपनिरीक्षक रमेश कुमार के मुताबिक, पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में यह मामला किसी पुराने आपसी विवाद से भी जुड़ा हुआ लग रहा है। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
