पिछले दो-तीन दिनों से मौसम करवट ले चुका है। खासतौर पर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में दिन में तेज धूप के चलते न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसे में ठंड कम होने के साथ ही शीतलहर गायब हो चुकी है। गर्मी की आहट को देखते हुए कई लोगों ने अपने गर्म कपड़े संभालने भी शुरू कर दिए हैं। अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं तो, जरा रुक जाएं... ये खबर पढ़ लें... वरना ठंड आपको परेशान कर सकती है। क्योंकि ठंड अभी गई नहीं है, बल्कि आज रात से ठंड की नई लहर देखने को मिल सकती है, जो आपको एक बार फिर से ठिठुरने पर मजबूर कर देगी।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आज से बढ़ाएगा ठिठुरन
जी हां, उत्तर भारत में मौसम का मिजाज आज रात से फिर तेजी से बदलने वाला है। एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) आज रात यानी गुरुवार 22 जनवरी से उत्तर भारत को प्रभावित करने जा रहा है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव में पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं के आसार भी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह सक्रिय सिस्टम पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उससे सटे मैदानी इलाकों में असर दिखा रहा है और इसका सबसे प्रभावी चरण कल यानी शुक्रवार 23 जनवरी तक रहने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार यह पश्चिमी विक्षोभ अरब सागर से नमी लेकर आ रहा है, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। ज्यादा इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी का अनुमान है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में कहीं-कहीं भारी हिमपात हो सकता है। इससे पहाड़ों में ताजा बर्फ की अच्छी परत जमने की उम्मीद है, जो इस मौसम में अब तक सूखे रहे इलाकों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
हालांकि, भारी बारिश और बर्फबारी के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के बंद होने, भूस्खलन और एवलांच का खतरा भी बढ़ सकता है। शिमला, मनाली, गुलमर्ग और अन्य पर्यटन स्थलों पर जाने वाले यात्रियों को इस दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासतौर पर सोमवार को गणतंत्र दिवस के चलते, इस लंबे वीकेंड में पहाड़ी इलाकों की ओर रुख करने वाले लोगों को चेतावनी दी गई है।
मैदानी उत्तर-पश्चिम भारत में भी इस सिस्टम का असर देखने को मिलेगा। विशेषतौर पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और NCR में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भूमध्य सागर के आसपास उत्पन्न होने वाली एक मौसम संबंधी प्रणाली है, जो पश्चिमी हवाओं के साथ हजारों किलोमीटर का सफर तय कर उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंचती है। यह प्रणाली सर्दियों के मौसम में बारिश और हिमपात का मुख्य कारण होती है।
उम्मीद की जा रही है कि यह मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में लंबे समय से जारी शुष्क सर्दी के दौर को खत्म कर देगा। बारिश से पहले न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो और भी हो सकती है, लेकिन इसके बाद तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। दिल्ली सहित कई इलाकों में अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से नीचे जा सकता है, जिससे ठंड और बढ़ेगी।
IMD के अनुसार 23 जनवरी के बाद यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है, लेकिन 26 जनवरी के आसपास एक और नया पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है। यह बारिश और बर्फबारी जलाशयों, कृषि और हिमालयी बर्फ भंडार के लिए काफी फायदेमंद होगी। हालांकि, संभावित बाधाओं को देखते हुए सतर्कता और तैयारी बेहद जरूरी है।
