Moonsoon 2026 Update: देश में चिलचिलाती गर्मी और लू के बीच मानसून का इंतजार कर रहे करोड़ों भारतीयों और विशेषकर किसानों के लिए मौसम विभाग से एक मायूस करने वाली खबर आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को मानसून का अपना दूसरा विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। इसके मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के दौरान पूरे देश में 'सामान्य से कम' (Below Normal) या बेहद 'न्यून' (Deficient) बारिश होने का प्रबल अनुमान है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार चार महीनों के मानसूनी सीजन में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का महज 90% रहने की संभावना है, हालांकि इसमें 4% ऊपर-नीचे होने की गुंजाइश है। गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले अप्रैल में मौसम विभाग ने 92% बारिश का अनुमान लगाया था, जिसे अब और घटा दिया गया है।
आंकड़ों में समझिए मानसून का गणित
मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस साल देश में अच्छी बारिश की उम्मीदें बहुत कम हैं। देश में इस बात की 84% संभावना है कि मानसून 'कमजोर' रहेगा। इसमें से 60% संभावना तो बहुत ही कम यानी 'Deficient' (न्यून) बारिश की है, जबकि 24% संभावना 'सामान्य से कम' बारिश की जताई गई है। बता दें कि पिछले 50 सालों में मानसूनी सीजन के दौरान देश में औसतन 87 सेंटीमीटर (35 इंच) बारिश होती आई है, जिसे दीर्घकालिक औसत (LPA) कहा जाता है। जब बारिश 96% से 104% के बीच हो, तभी उसे 'सामान्य' माना जाता है। लेकिन 90% का आंकड़ा देश के लिए खतरे की घंटी है।
जून महीने से ही दिखेगा असर
मानसून की शुरुआत के पहले महीने यानी जून 2026 में भी राहत की उम्मीद नहीं है। जून में बारिश LPA के 92% से भी कम रहने के आसार हैं। इसका मतलब है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जून के दौरान उमस भरी गर्मी और पानी की किल्लत बनी रहेगी, जिससे फसलों की शुरुआती बुवाई में देरी हो सकती है।
जानिए आपके इलाके में कैसी रहेगी स्थिति
पूर्वानुमान के मुताबिक, पूर्वोत्तर (North East) भारत को छोड़कर देश का कोई भी कोना इस कमी से अछूता नहीं रहेगा। उत्तर-पश्चिम भारत के दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में सबसे तगड़ी मार पड़ सकती है। यहा बारिश LPA के 92% से कम रहने का अनुमान है। मध्य और दक्षिण भारत के हिस्सों में भी मानसूनी फुहारें काफी कमजोर (<94% LPA) रहेंगी। भारत के जो क्षेत्र पूरी तरह वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं, उन मानसून कोर जोन (MCZ) में भी वर्षा 94% से कम होगी। यह देश के कृषि उत्पादन के लिए सबसे बड़ा झटका है। केवल पूर्वोत्तर भारत (North-East India) ही ऐसा क्षेत्र होगा जहां मानसून सामान्य (94-106% LPA) रहने की उम्मीद है।
इस मानसून कहां कितनी होगी बारिश (IMD)
मैप के जरिए दिखाया गया यह पूर्वानुमान भारत में जून से सितंबर 2026 के बीच होने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश की स्थिति को दर्शाता है। इसमें तीन श्रेणियां बनाई गई हैं – सामान्य से कम, सामान्य, और सामान्य से अधिक। हर श्रेणी की संभावना बराबर मानी जाती है यानी 33.33%। मॉडल ने अलग-अलग इलाकों के लिए यह बताया है कि किस श्रेणी की बारिश सबसे ज्यादा संभावित है और उसकी कितनी संभावना है। जहां नक्शे में सफेद रंग दिखाया गया है, वहां मॉडल से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।
आखिर क्यों रूठा मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तबाही और कम बारिश के पीछे सबसे बड़ा विलेन 'अल नीनो' (El Nino) है। वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Region) में अल नीनो की स्थितियां तेजी से विकसित हो रही हैं। यह एक ऐसा समुद्री और मौसमी पैटर्न है, जो वैश्विक स्तर पर हवाओं के रुख को बदल देता है और आमतौर पर भारतीय मानसून को पूरी तरह दबा या सुखा देता है। वहीं, दूसरी ओर मानसून को सहारा देने वाला हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole- IOD) वर्तमान में न्यूट्रल स्थिति में है और पूरे सीजन इसके ऐसे ही रहने की संभावना है, जिससे मानसून को कोई अतिरिक्त मदद नहीं मिल पाएगी।
देश के सामने खड़ी होने वाली 4 बड़ी चुनौतियां
कम बारिश का सीधा असर केवल खेतों पर ही नहीं, बल्कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। बारिश न होने से फसलों खासकर धान और दलहन की पैदावार घटेगी, जिससे बाजार में महंगाई बढ़ सकती है। इसके अलावा देश के प्रमुख जलाशयों और बांधों में पानी का स्तर गिरेगा, जिससे शहरों और गांवों में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। नदियों और बांधों में जल स्तर कम होने से हाइड्रोपावर का उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे बिजली कटौती बढ़ सकती है। साथ जून के महीने में बारिश न होने से उत्तर और मध्य भारत में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू (Heatwave) के थपेड़े लोगों को बीमार करेंगे।
बचाव के लिए IMD की जरूरी सलाह
संकट को भांपते हुए मौसम विभाग ने सरकारों और आम जनता के लिए आकस्मिक योजनाएं बनाने की सलाह दी है। किसानों को ऐसी फसलें उगाने की सलाह दी जा रही है जिनमें पानी की कम खपत होती है। पानी के हर एक कतरे का सोच-समझकर इस्तेमाल करने और जल संचयन प्रणालियों को मजबूत करने की जरूरत है। स्थानीय स्तर पर सूखा राहत सिस्टमों को अभी से एक्टिव करने को कहा गया है।
