Delhi-Mumbai Air Quality: देश के दो सबसे बड़े महानगर दिल्ली और मुंबई में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और मीथेन (CH₄) जैसी ग्रीनहाउस गैसों का स्तर लगातार बढ़ रहा है। यह खुलासा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (IIT Bombay) के एक हालिया स्टडी में हुआ है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह न केवल एयर क्वालिटी को और बिगाड़ सकती है बल्कि क्लाइमेट चेंज की दिशा में भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
दिल्ली और मुंबई में खतरनाक रूप से बढ़ा वायु प्रदूषण
दिल्ली में हवा हुई जहरीली, AQI 237 पर पहुंचा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बुधवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 201 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। गुरुवार को बढ़कर यह 237 तक पहुंच गया। अनुमान है कि शुक्रवार तक यह बढ़कर 300 के पार तक जा सकता है, जो 'बहुत खराब' श्रेणी मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
मुंबई में भी नहीं सुधरे हालात
मानसून की वापसी के बाद मुंबई की वायु गुणवत्ता में भी गिरावट आई है। शहर का औसत AQI 153 रिकॉर्ड किया गया, जो “मध्यम” श्रेणी में आता है, लेकिन फिर भी प्रदूषित माना जाता है। यह आंकड़ा मुंबई के 30 में से 25 मॉनिटरिंग सेंटरों से प्राप्त डेटा पर आधारित है।
IIT बॉम्बे ने सैटेलाइट से किया अध्ययन
IIT बॉम्बे के प्रोफेसर मनोरंजन साहू और शोधकर्ता आदर्श अलगड़े के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन के लिए नासा के ऑर्बिटिंग कार्बन ऑब्जर्वेटरी-2 से कार्बन डाइऑक्साइड और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल-5पी सैटेलाइट से मीथेन गैस के आंकड़े जुटाए गए। अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया कि दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर लगातार बढ़ रहा है और यह मौसमी और क्षेत्रीय रूप से भी भिन्नता दर्शाता है।
‘हॉटस्पॉट’ इलाकों की पहचान
शोध में सामने आया कि मीथेन गैस के 'हॉटस्पॉट' यानी अधिक कंसेंट्रेशन वाले क्षेत्र, उन जगहों पर अधिक पाए गए जहां कचरा, सीवेज या औद्योगिक गतिविधियां ज्यादा थीं। यह स्थानीय प्रदूषण स्रोतों की पहचान में मददगार साबित हो सकता है।
भविष्य के लिए मॉडल तैयार
शोधकर्ताओं ने शहर-विशेष सांख्यिकीय मॉडल भी विकसित किए ताकि भविष्य में गैसों के स्तर का अनुमान लगाया जा सके। इसके लिए उन्होंने सीजनल ऑटोरेग्रेसिव इंटीग्रेटेड मूविंग एवरेज (SARIMA) मॉडल का इस्तेमाल किया, जो समय के साथ बदलते डेटा का विश्लेषण करता है। अध्ययन के निष्कर्ष ‘एनवायरनमेंटल साइंस एंड पॉल्यूशन रिसर्च’ जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि सैटेलाइट से मिले ये आंकड़े नीति-निर्माताओं के लिए अहम साबित हो सकते हैं, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि किस इलाके से सबसे ज्यादा प्रदूषण हो रहा है और वहां कैसे सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि CO₂ और मीथेन जैसी गैसों का बढ़ता स्तर जलवायु परिवर्तन के लिए गंभीर संकेत है और इस पर तुरंत नियंत्रण की जरूरत है।
सरकार ने लागू किया GRAP का पहला चरण
इस बीच, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू कर दिया है। इसके तहत निर्माण गतिविधियों, वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
