हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई के बाद एक बार फिर मल्टी-लेवल मार्केटिंग और डायरेक्ट सेलिंग मॉडल चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बीते महीनों में चलाए गए संयुक्त अभियान में 32 लोगों की गिरफ्तारी के साथ ही विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले पर फिर ध्यान केंद्रित हो रहा है।
हैदराबाद पुलिस। (सांकेतिक तस्वीर)
क्या है पूरा मामला?
हैदराबाद पुलिस ने अप्रैल माह में तीन राज्यों में समन्वित अभियान चलाकर 32 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि कथित नेटवर्क के जरिए लोगों को व्यवसाय और निवेश के अवसरों के नाम पर जोड़ा जाता था। अब तक दर्ज मामलों में कई पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और लाखों रुपये के कथित वित्तीय नुकसान की जानकारी सामने आई है।
दिखाए जाते थे सपने
पुलिस का दावा है कि लोगों को 5 से 10 लाख रुपये तक निवेश करने पर दो वर्षों में करोड़ों रुपये तक की आय होने के सपने दिखाए जाते थे। जांचकर्ताओं के मुताबिक, शुरुआती चरण में कंपनी के नाम, एमएलएम संरचना या कमीशन आधारित मॉडल की पूरी जानकारी नहीं दी जाती थी।
क्या है ये मॉडल?
पुलिस का आरोप है कि नेटवर्क कथित तौर पर "बाइनरी मॉडल" पर संचालित होता था। इस व्यवस्था में प्रत्येक सदस्य को दो नए लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था, जिससे नेटवर्क लगातार विस्तार करता जाता था। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस मॉडल में उत्पादों की बिक्री की तुलना में नए सदस्यों की भर्ती को अधिक महत्व दिया जाता था।
हैदराबाद पुलिस कर रही जांच
हैदराबाद पुलिस इस मामले की जांच प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट, 1978 समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कर रही है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, नेटवर्क की संरचना और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने लोगों को त्वरित और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा करने वाली योजनाओं से सावधान रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में न केवल योजनाओं का संचालन करने वाले बल्कि कुछ परिस्थितियों में उनसे जुड़े लोग भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल यह मामला देश में संचालित एमएलएम और डायरेक्ट सेलिंग मॉडलों को लेकर बहस को फिर से तेज करता नजर आ रहा है।
