क्या तुर्किए से भारत आई होली की शान गुझिया? भारत में किस शहर की है पहचान; जानें इतिहास

गुझिया नहीं खाई तो होली क्या मनाई, इन दोनों का संबंध ही कुछ ऐसा है। माना जाता है कि आधुनिक गुझिया 16-17वीं सदी में बुंदेलखंड में बनी, जबकि कुछ इतिहासकार इसकी जड़ें तुर्किए की मशहूर डिश Baklava से जोड़ते हैं। वहीं संस्कृत ग्रंथों की ‘करणिका’ को भी इसका प्राचीन भारतीय रूप माना जाता है।

KEY HIGHLIGHTS
  • प्राचीन भारत के संस्कृत ग्रंथों में गुझिया को करणिका कहा गया है
  • माना जाता है कि गुझिया तुर्की की बकलावा डिश से प्रेरित है
  • गुझिया को घुघरा, करांजी और पेड़किया भी कहते हैं

कुछ ही दिनों में होली आने वाली है। होली पर रंगों के साथ ही एक और परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और वह है गुझिया बनाने, खाने और खिलाने की। गुझिया की मिठास होली के रंगों को और भी खास बनाती है। आह गुझिया और होली एक-दूसरे के साथ इस तरह से जुड़ गए हैं कि इन्हें अलग करके देखा ही नहीं जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुझिया पहली बार कहां बनी? कैसे इसका नाता होली से जुड़ा? आज भारत के किस शहर की पहचान गुझिया से जुड़ी है? इसके अलावा एक और प्रश्न का उत्तर खोजेंगे कि क्या होली की शान गुझिया तुर्किए से भारत में आयी या यह भारत की अपनी डिश है?

holi special Gujhia.

गुझिया का जन्म कब और कहां हुआ

गुझिया का मौजूदगी भारतीय पकवानों के इतिहास में काफी पुरानी है। हालांकि, इतिहास के पन्नों में बहुत कम और आम चलन में इसे खाने की परंपरा ज्यादा रही है। गुझिया के बारे में किताबों में काफी कम लिखा गया है, लेकिन शास्त्रों व ग्रंथों में नाममात्र के लिए ही सही, इसका जिक्र मिलता जरूर है।

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