हरियाणा-राजस्थान जल समझौते पर मचा सियासी बवाल, यमुना के पानी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा

हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए नए जल समझौते ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। समझौते के तहत मानसून के दौरान यमुना का पानी पाइपलाइन के जरिए राजस्थान भेजा जाएगा, लेकिन इसे लेकर हरियाणा में विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि जल संकट से जूझ रहे राज्य के हितों की अनदेखी कर दूसरे राज्य को पानी देना उचित नहीं है।

Haryana Rajasthan Water Agreement: हरियाणा और राजस्थान के बीच हाल ही में एक जल समझौता हुआ है जिसके तहत हरियाणा यमुना से राजस्थान को पानी मुहैया करवाएगा। लेकिन इस समझौते का लेकर हरियाणा में विरोध शुरू हो गया है। हरियाणा के विपक्षी दलों ने कहा है कि हरियाणा में पहले ही पानी की काफी किल्लत है। ऐसे में हमारे हिस्से का पानी दूसरे राज्य को क्यों दिया जा रहा है। समझौते के तहत वर्ष 1994 में हुए अपर यमुना रिवर बोर्ड के जल बंटवारा समझौते के अनुसार राजस्थान को उसके हिस्से का पानी देने का रास्ता साफ हो गया है। हरियाणा और राजस्थान ने 29 जून को दिल्ली में जल समझौते को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत मानसून के दौरान हरियाणा पाइप लाइन के जरिए राजस्थान को पानी भेजेगा। इस समझौते के बाद रेणुका डैम, किशाऊ डैम और लखवार डैम जैसी बांध परियोजनाओं के निर्माण में भी तेजी आने की उम्मीद है।

Haryana Rajasthan Water Agreement

अभय चौटाला बोले- जब तक एसवाईएल का पानी नहीं मिलता राजस्थान को अपना पानी नहीं जाने देंगे

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस समझौते पर कहा कि 1994 के समझौते के अनुसार जुलाई से लेकर अक्टूबर तक वर्षा के पानी को राजस्थान पेयजल के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। वर्षा के पानी को हथनीकुंड बैराज से पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान भेजा जाएगा। हमारे बुजुर्गों और सनातन संस्कृति के अनुसार प्यासे को पानी उपलब्ध करवाना हम सब की सांझी जिम्मेदारी है। लेकिन इस समझौते को लेकर हरियाणा में विरोध शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने कहा है कि वह किसी भी कीमत पर हरियाणा का पानी राजस्थान नहीं जाने देंगे। इनेलो के राष्टीय अध्यक्ष अभय चौटाला ने कहा कि पहले भी ऐसा समझौता कांग्रेस के समय में 1994 में हो चुका है। उसमे कहा गया था जब डैम बन जाएंगे उसके बाद ही पानी दिया जाएगा।

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