गुजरात की राजनीति में इस बार स्थानीय निकाय चुनावों ने एक नए बदलाव के संकेत दिए हैं। लंबे समय से राज्य की राजनीति पर काबिज पारंपरिक दलों के बीच अब आम आदमी पार्टी (AAP) तेजी से अपनी जगह बनाती नजर आ रही है। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि राज्य में अब तीसरी ताकत के रूप में AAP मजबूत होती जा रही है और जनता विकल्प की ओर बढ़ रही है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जीतने वाले पार्टी उम्मीदवारों को बधाई दी है।
गुजरात निकाय चुनाव में जीतने वाले AAP प्रत्याशियों को केजरीवाल ने दी बधाई
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में केजरीवाल ने लिखा, 'गुजरात में हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर FIR हुई, उन्हें जेल में डाला गया, लेकिन फिर भी उन्होंने डटकर चुनाव लड़ा। आम आदमी पार्टी ने पिछली बार की तुलना में लगभग 10 गुना सीटें ज्यादा जीती हैं।'
बोले केजरीवाल - कमल उखाड़ने के लिए झाडू पर भरोसा
अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा, जिस तेजी के साथ गुजरात में आम आदमी पार्टी आगे बढ़ रही है, एक बात तो साफ है कि गुजरात से कमल को उखाड़ने के लिए जनता अब 'झाड़ू' पर भरोसा कर रही है। अरविंद केजरीवाल ने AAP नेता Isudan Gadhvi के सोशल मीडिया पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए यह लिखा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो AAP की बढ़त चौंकाने वाली है। पिछली बार जहां पार्टी को केवल 69 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 650 से अधिक पहुंच गया है। यह लगभग 10 गुना वृद्धि है, जो राज्य में पार्टी के बढ़ते जनाधार को दर्शाती है। नर्मदा जिला पंचायत में बहुमत हासिल करना और कई तालुका पंचायतों में जीत दर्ज करना इस बात का संकेत है कि AAP अब ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी मजबूत पकड़ बना रही है।
यहां बीजेपी का खाता भी नहीं खुला
देदियापाड़ा जैसे आदिवासी इलाकों में सभी 11 जिला पंचायत सीटों पर जीत दर्ज करना और बीजेपी का खाता तक न खुलना एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। इससे यह साफ होता है कि जिन क्षेत्रों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया, वहां अब मतदाता बदलाव की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, अमरेली जिले के बगसरा तालुका पंचायत में 16 में से 10 सीटों पर जीत ने भी AAP की बढ़ती ताकत को साबित किया है।
इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। एक भी जिला पंचायत पर कब्जा न कर पाना उसके घटते जनाधार को दर्शाता है। दूसरी ओर, बीजेपी को पहली बार इतनी स्पष्ट चुनौती मिलती दिख रही है।
AAP की रणनीति शिक्षा, स्वास्थ्य, सस्ती बिजली और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही है, जिससे युवा, महिलाएं और किसान बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं। खास बात यह है कि प्रतिकूल परिस्थितियों, FIR और गिरफ्तारियों के बावजूद पार्टी को मिला समर्थन यह दर्शाता है कि जनता अब बदलाव के लिए तैयार है। गुजरात की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।
