अहमदाबाद : गुजरात सरकार ने जनस्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए राज्यभर में नॉन-स्टैंडर्डाइज्ड एनालॉग पनीर, एनालॉग चीज और एनालॉग बटर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पिछले चार महीनों से राज्य का खाद्य एवं औषधि विभाग लगातार जांच और सैंपलिंग कर रहा था, जिसमें ऐसे उत्पादों के मामले सामने आए जो दूध के बजाय वनस्पति तेल और अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किए जा रहे थे।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा कि गुजरात देश का अग्रणी डेयरी राज्य है और लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों की मेहनत से लोगों तक शुद्ध दूध और उससे बने उत्पाद पहुंचते हैं। ऐसे में यदि दूध से बने पनीर की जगह एनालॉग पनीर को पनीर बताकर बेचा जाता है, तो इससे उपभोक्ता भ्रमित होते हैं और डेयरी उद्योग को नुकसान पहुंचता है।
फूड एंड ड्रग्स विभाग की छापेमारी
उन्होंने बताया कि राज्यभर में फूड एंड ड्रग्स विभाग ने पिछले चार महीनों के दौरान लगातार छापेमारी और जांच अभियान चलाया। जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के बाद यह पाया गया कि एनालॉग पनीर पोषण की दृष्टि से वास्तविक पनीर जैसा नहीं है और ऐसे उत्पादों की बिक्री जनस्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार द्वारा एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने के बाद गुजरात सरकार ने भी आज से इसके उत्पादन, बिक्री और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यदि कोई व्यक्ति या फूड बिजनेस ऑपरेटर इस प्रतिबंध का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए लगाया गया है। राज्य सरकार ने सभी उत्पादकों, व्यापारियों, होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और अन्य फूड बिजनेस ऑपरेटरों से केवल मानक अनुरूप और शुद्ध पनीर का ही उपयोग और बिक्री करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और असली खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना, डेयरी उद्योग की सुरक्षा करना तथा जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
