ब्लड प्रेशर हो या एसिडिटी की समस्या, एंटीबायोटिक की जरूरत हो या दर्ज और सूजन कम करने की दवा की या फिर एंग्जाइटी कम करनी की दवा ही क्यों न हो। अगर आपको दिक्कत है तो आप इन दवाओं को अक्सर अपने पास ही रखते हैं। आपकी परेशानी का अंत करने वाली यह दवाएं ही अगर नकली होंगी तो सोचिए आपकी सेहत पर इनका कितना बुरा असर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संदिग्ध नकली दवाओं का भारी जखीरा जब्त किया गया है।
लखनऊ में नकली दवाओं का जखीरा बरामद
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच के दौरान यहां एक बड़े संदिग्ध दवा सप्लाई नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि राजस्थान से तैयार होकर आने वाली दवाएं बिना बिल के लखनऊ सहित राज्य के कई जिलों में भेजी जा रही थीं। अब तक करीब 24 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गई हैं। हालांकि, ये दवाएं वास्तव में नकली हैं या नहीं, इसका अंतिम फैसला सरकारी लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।
31 सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए
FSDA ने शहर के अमीनाबाद स्थित एक गोदाम से लगभग 21 लाख रुपये और बख्शी का तालाब क्षेत्र से करीब 3 लाख रुपये की संदिग्ध नकली दवाएं सील की हैं। दोनों स्थानों से कुल 31 सैंपल जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
जब्त की गई दवाओं में ये भी शामिल
जब्त की गई दवाओं में Telma (ब्लड प्रेशर), Pantop-40 (एसिडिटी), Clavam-625, Augmentin, MOXYZIDE-CV, RIOPOD-CV (एंटीबायोटिक), Zerodol-SP, Talgesic Injection, Flozen-AA (दर्द और सूजन), Alpha (Alprazolam) (एंग्जायटी) और Chymoral Forte जैसी दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मरीज रोज करते हैं। इनमें से कई दवाएं तो बिना डॉक्टर की पर्ची के कैमिस्ट से ओवर द टॉप भी मिल जाती हैं।
नकली ब्लड प्रेशर की दवा हार्ट अटैक दे सकती है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर जांच में ये दवाएं नकली या मानक से कम गुणवत्ता वाली पाई जाती हैं तो मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा पैदा कर सकती हैं। ब्लड प्रेशर की दवा अगर प्रभावी न हुई तो इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है, जबकि घटिया एंटीबायोटिक किसी इंफेक्शन को गंभीर बनाने के साथ एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी समस्या भी बढ़ा सकती हैं। दर्द और एंटी-एंग्जायटी दवाओं की गुणवत्ता खराब होने पर भी गंभीर दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते हैं।
इन जिलों में हुई नकली दवा की सप्लाई
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित नकली दवाओं के नेटवर्क का मुख्य स्रोत राजस्थान था। वहां से दवाएं निजी बसों और रोडवेज के जरिए लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोंडा और सीतापुर सहित कई जिलों में भेजी जाती थीं। भुगतान डिजिटल माध्यमों से किया जाता था और बिना बिल कम कीमत पर खरीदी गई दवाओं को बाजार में अधिक मुनाफे पर बेचा जाता था।
मेडिसिन इंस्पेक्टर की शिकायत पर आठ आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराओं (111, 318(4), 319(2), 276, 277 और 278) के तहत FIR दर्ज कराने की सिफारिश की गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था। उधर, लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने पूरे नेटवर्क के सरगनाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
