Delhi News: दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जीवनरक्षक कैंसर रोधी दवाओं के अवैध और खतरनाक कारोबार में शामिल एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अलग-अलग राज्यों से कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान लगभग 9 करोड़ रुपये मूल्य की कैंसर रोधी दवाएं और 50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। यह गिरोह दिल्ली-NCR, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई बड़े हिस्सों में फैला हुआ था और अस्पतालों तथा सरकारी गोदामों से दवाओं की हेराफेरी कर उन्हें खुले बाजार में बेचता था।
दिल्ली-NCR से हैदराबाद तक कैंसर की नकली दवाओं का कारोबार
12 जुलाई को दर्ज हुआ मामला, दिल्ली और नवी मुंबई में हुई छापेमारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की गुप्त सूचना 22 जून को मिली थी, जिसके बाद मामले की गोपनीय जांच शुरू की गई। 11 जुलाई को औषधि विभाग और स्थानीय पुलिस के सहयोग से दिल्ली और नवी मुंबई में कई संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच में साक्ष्य मिलने के बाद 12 जुलाई 2026 को अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और चरणबद्ध तरीके से गिरफ्तारियां की गईं।
जब्ती में क्या-क्या मिला?
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस अभियान में भारी मात्रा में मेडिकल सामग्री और नकदी जब्त की गई है। कैंसर रोधी दवाओं की 588 भरी हुई शीशियां, 6 खाली शीशियां, 7 खाली डिब्बे और अन्य दवाओं के 3,021 पत्ते। 50 लाख नकद, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लेन-देन के दस्तावेज और पैकेजिंग सामग्री। पुलिस को कुछ रजिस्टर भी मिले हैं, जिनमें नकदी के लेन-देन और दवाइयों की डिलीवरी का पूरा लेखा-जोखा दर्ज है।
कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?
अपराध शाखा की जांच में सामने आया कि यह गिरोह तीन मुख्य तरीकों से महंगी कैंसर रोधी दवाएं हासिल करता था। पहला ये बिना किसी वैध लाइसेंस और चालान के अनधिकृत निर्माताओं से नकली दवाएं खरीदता था। निजी और सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ तथा कर्मियों की मदद से मरीजों के लिए आई असली दवाओं की हेराफेरी करता था और असली डिब्बों का दोबारा इस्तेमाल करने के लिए एसीटोन जैसे रसायनों का इस्तेमाल कर पुरानी बैच संख्या और MRP को मिटा देता था ताकि किसी को शक न हो।
बिचौलिए से लेकर नर्सिंग स्टाफ तक, देश भर से 17 गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में मेडिकल स्टोर संचालक, फार्मास्युटिकल कंपनियों के मालिक, बिचौलिए और अस्पतालों के कर्मचारी शामिल हैं। विभिन्न राज्यों से कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली के लक्ष्मी नगर और गोविंदपुरी क्षेत्रों से अभिषेक वैश्य (26), शुभम कुमार चौधरी (25), सूरज चौधरी (22) और सतीश कुमार (30) को पकड़ा गया। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और नोएडा से गगन (28), विश्वास त्यागी (35) और आनंद कुमार (42) गिरफ्तार हुए। हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और झज्जर से दीपक उर्फ रवि (33), जसवंत शर्मा (42), मुकेश (30), मयंक गर्ग (35) और परमजीत श्योराण (34) को दबोचा गया। तेलंगाना के हैदराबाद से श्रीनिवासुलु कालवा (52), रामदास सतीश कुमार (42) और मालूगारी श्रीनाथ रेड्डी (35) गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा महाराष्ट्र के नवी मुंबई से आयुष कुमार (23) और राजस्थान के अलवर से मनीष शर्मा (28) को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड या लाइसेंस के इन संवेदनशील दवाओं को रिहायशी इलाकों और गोदामों में छुपाकर रखते थे। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज को खंगाल रही है ताकि इसमें शामिल बाकी मास्टरमाइंड्स और संपत्तियों का पता लगाया जा सके।
