Delhi Blast Investigation: जांच टीमें 10 नवंबर की शाम लाल किले के पास हुए धमाके से पहले की घटनाओं की कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। इसी क्रम में, उन्होंने उस पार्किंग जोन में दाखिल होने वाले हर वाहन की एक विस्तृत सूची तैयार की है, जहां संदिग्ध कार लगभग तीन घंटे तक खड़ी रही थी। एक अधिकारी के मुताबिक, पुलिस ने सुनहरी मस्जिद पार्किंग में आने-जाने वाली सभी गाड़ियों का पूरा ब्योरा इकट्ठा कर लिया है। अब उनकी पंजीकरण संख्या की जांच की जा रही है और गाड़ियों के ड्राइवरों व मालिकों से यह पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्होंने हरियाणा नंबर की वह हुंडई i20 देखी थी, जो विस्फोट में इस्तेमाल हुई। सूत्रों के अनुसार, कार के चालक डॉ. उमर नबी ने सोमवार को जब गाड़ी पार्क की थी, तब उस समय उसके आसपास कई अन्य वाहन भी खड़े थे।
दिल्ली विस्फोट के बाद जांच तेज (फोटो: एएनआई)
क्या जानने की चल रही है प्रक्रिया?
एक सूत्र के अनुसार, उस समय पार्किंग में मौजूद हर ड्राइवर की पहचान की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी ने एचआर-26 नंबर वाली कार को देखा था, उसमें कितने लोग थे और क्या उमर के साथ कोई और व्यक्ति भी मौजूद था। एक अधिकारी ने बताया कि जांच दल ने कई चालकों को उमर की तस्वीर दिखाकर यह जानने की कोशिश की कि वो कार में अकेला था या तीन घंटे की पार्किंग के दौरान कोई और व्यक्ति वाहन में आया-गया था। अधिकारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन तीन घंटों के भीतर हुई वास्तविक घटनाओं की तस्वीर साफ करना है और यह भी सुनिश्चित करना है कि विस्फोटक सामग्री कार में पार्किंग के दौरान ही रखी गई थी या पहले से मौजूद थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस विस्फोट के पीछे संभावित बड़ी साजिश की जांच के लिए अब एक अलग एफआईआर दर्ज की है, जिसमें आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धाराएं शामिल की गई हैं।
मुजम्मिल से जुड़े करीब 15 डॉक्टर लापता
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज की गई शुरुआती एफआईआर अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है। जांचकर्ता यह भी परख रहे हैं कि गिरफ्त में लिए गए डॉक्टर मुजम्मिल गनई का हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े डॉक्टरों के एक समूह से लगातार संपर्क था या नहीं। सूत्र बताते हैं कि विश्वविद्यालय से जुड़े करीब 15 डॉक्टर, जो मुजम्मिल के संपर्क में थे, फिलहाल लापता बताए जा रहे हैं। एक सूत्र के मुताबिक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड में मुजम्मिल और इन डॉक्टरों के बीच कई बार बातचीत होने के संकेत मिले हैं, लेकिन जब एजेंसी ने उन डॉक्टरों से बात करने की कोशिश की, तो उनके मोबाइल स्विच ऑफ मिले।
10 नवंबर को हुआ था धमाका
अल फलाह विश्वविद्यालय भेजी गई जांच टीम ने पाया कि जिन डॉक्टरों से पूछताछ की जानी थी, उनमें से ज्यादातर वहां मौजूद ही नहीं थे। अब यह जांच की जा रही है कि इन लापता व्यक्तियों की किसी आतंकी साजिश की योजना बनाने या उसे अंजाम देने में कोई भूमिका तो नहीं है। एजेंसियों ने 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले एक “व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल” का पर्दाफाश किया था, जिसमें 2,900 किलो विस्फोटक बरामद किए गए थे और तीन डॉक्टरों समेत आठ लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसी कार्रवाई के कुछ घंटों बाद दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक धीमी गति से चल रही कार में तेज धमाका हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह मामला अब भी गहराई से जांच के अधीन है।
(इनपुट - भाषा)
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