क्या दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार फीडबैक यूनिट का इस्तेमाल राजनीतिक जासूसी के लिए करती है। दरअसल सीबीआई ने खुलासा करते हुए कहा कि यह यूनिट वैसे तो दिल्ली सरकार के विभागों में कामकाज की निगरानी के लिए बनाई गई थी। लेकिन असल मकसद कुछ और निकला। सीबीआई ने मनीष सिसोदिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है। बता दें कि एफबीयू का गठन 2015 में किया गया था। 2016 में सतर्कता विभाग के एक अधिकारी ने शिकायत दर्ज करायी थी कि इसकी आड़ में जासूसी की जा रही है। 2015 में ही इस यूनिट के खिलाफ आवाज उठी थी और बाद में मामला सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया था।
मनीष सिसोदिया, दिल्ली के डिप्टी सीएम
आम आदमी पार्टी की सरकार 2015 में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में आई थी और विभागों के कामकाज को लेकर करीब 20 अधिकारियों की टीम बनी जिसमें अलग अलग विभागों से लोगों को कांट्रैक्ट पर रखा गया था। इन लोगों पर आरोप है कि दिल्ली पुलिस इन लोगों के जरिए जासूसी करा रही थी। इस तरह की शिकायत के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की और 2021 में सीबीआई ने अपने निदेशक को प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। अब इस सिलसिले में सीबीआई ने एलजी दफ्तर से मनीष सिसोदिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की इजाजत मांगी है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक तौर पर हलचल बढ़ने की संभावना है। बता दें कि इससे पहले दिल्ली की नई आबकारी नीति में सीबीआई की दायर चार्जशीट में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का नाम शामिल है। अब इस चार्जशीट में सीएम अरविंद केजरीवाल के नाम के शामिल होने की बात सामने आ रही है।
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