आपने फिल्म दृष्यम जरूर देखी होगी। जिसमें पुलिस बार-बार विजय सलगांवकर के परिवार से एक ही प्रश्न पूछती है कि वह 2-3 अक्टूबर को कहां थे? खैर ये तो फिल्म की बात थी। अगर दिल्ली-एनसीआर के लोगों से पूछा जाए दो इस साल 2-3 अक्टूबर को कहां थे तो बहुत से लोगों का जवाब मसूरी (Mussoorie), कैंची धाम और नैनीताल (Nainital) के जाम में से कोई एक होगा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती की छुट्टी, 3 अक्टूबर को शनिवार और 4 अक्टूबर रविवार। लॉन्ग वीकेंड आते ही दिल्ली-एनसीआर के लोग पहाड़ों की ओर रुख करते हैं। लेकिन दिल्ली-एनसीआर वालों की इस वीकेंड सैर की आदत के चलते पहाड़ बेहाल हैं। यहां की पतली घुमावदार सड़कों पर घंटों लंबा जाम लग जाता है और इन पहाड़ों में चिल मारने गए लोग घंटों तक अपनी गाड़ियों में ही फंसे रह जाते हैं। मसूरी से लेकर कैंची-नैनीताल तक पर्यटक आखिर क्यों घंटों जाम में फंसने को मजबूर होते हैं? चलिए समझते हैं -
वैसे इत्तेफाक है कि इसी 2 अक्टूबर को दृष्यम-3 भी रिलीज हुई है। बहुत से लोग जो पहाड़ों के जाम में फंसने नहीं गए, उन्होंने विजय सलगांवकर के परिवार के साथ सिनेमाहॉल में समय बिताया।
आइडियल दूरी बड़ा कारण!
दूरी कहें या दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड के पहाड़ों की नजदीकी यहां वीकेंड जाम का सबसे बड़ा कारण है। जब दिल्ली-एनसीआर से मसूरी, नैनीताल या कैंची धाम की नजदीकी की बात हो रही है तो कुल दूरी और यात्रा में लगने वाला समय भी जान ही लीजिए।
दिल्ली से मसूरी
दिल्ली से मसूरी की दूरी लगभग 250-265 किमी है। आमतौर पर इस दूरी को तय करने में 6-7 घंटे का समय लगता है। लेकिन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद दिल्ली से देहरादून तक का 210 किमी सफर ढाई से तीन घंटे में तय हो जाता है। इसके बाद मसूरी पहुंचने में डेढ़-दो घंटे (जाम न होने पर) और लगते हैं। यानी दिल्ली से मसूरी पहुंचने में सिर्फ 4.5-5 घंटे लगते हैं।
मसूरी में वीकेंड पर जाम से जूझते रहे लोग
दिल्ली से कैंची धाम
दिल्ली से कैंचीधाम की दूरी लगभग 312-330 किमी है। NH9 से सफर करते हुए से रुद्रपुर तक तेजी से सफर तय हो जाता है। इसके बाद आगे हल्द्वानी, भीमताल और भवाली होते हुए पूरे सफर में 7-9 घंटे का समय (अगर जाम न हो तो) लगता है।
दिल्ली से नैनीताल
दिल्ली से नैनीताल जाने के लिए भी आपको NH-9 से होते हुए हल्द्वानी तक पहुंचना होगा। इसके बाद रानीबाग होते हुए नैनीताल तक का लगभग 286 से 320 किमी का सफर अगर जाम न हो तो 6-8 घंटे में तय होता है।
नैनीताल से कैंचीधाम
अगर आप नैनीताल पहुंच जाते हैं तो यहां से कैंचीधाम की दूरी लगभग 17 से 21 किमी के बीच है। यह दूरी जाम न होने पर लगभग 1 घंटे में तय हो जाती है।
इस तरह से आप देखेंगे कि अगर दिल्ली से सुबह 5 बजे से अपना सफर शुरू करें तो 10-11 बजे तक मसूरी, 11-12 बजे तक नैनीताल और 12-1 बजे तक कैंची धाम पहुंचना आसान है। सड़कें अच्छी होने और दूरी कम होने के चलते दिल्ली-एनसीआर के लोग अक्सर वीकेंड पर इन पहाड़ी इलाकों में पहुंच जाते हैं।
50 हजार की आबादी 22 लाख पर्यटक
खासतौर पर बात पहाड़ों की रानी मसूरी की करें तो यहां हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। यहां पर्यटकों की संख्या और आबादी के बीच का अंतर 42 गुना से अधिक हो गया है। मसूरी की अपनी आबादी 50 हजार भी नहीं है और यहां हर साल लगभग 22 लाख पर्यटक पहुंच रहे हैं। खासतौर पर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बनने के बाद इस संख्या में इजाफा ही हुआ है।
60 हजार जनसंख्या और 13 लाख से ज्यादा यात्री
नैनीताल की कुल आबादी लगभग 60 हजार है और यहां हर साल आने वाले पर्यटकों की संख्या 13 लाख से ज्यादा है। आबादी और पर्यटकों के बीच का यह अंतर साफ दिखाता है कि इन हिल स्टेशनों पर पर्यटकों का दबाव कितना ज्यादा है। इसी के चलते वहां ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या, होटलों में जगह न मिलना जैसी कई समस्याएं होती हैं।
कैंची के जाम के आगे सब फेल
पिछले कुछ वर्षों में कैंची धाम में लोगों की आस्था काफी बढ़ी है। मैं स्वयं उत्तराखंड के इसी हिस्से (रानीखेत) का रहने वाला हूं। मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं कि आज से 10 साल पहले जब हम कैंची क्षेत्र से होकर घर आते-जाते थे तो कई बार मंदिर निकल जाने के बाद याद आता था कि कैंची इलाके में हैं। लेकिन आज कई किलोमीटर लंबा जाम बताता है कि कैंची पहुंचने वाले हैं। कुमाऊं के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी शहर भी वीकेंड पर कैंची जाने वाले पर्यटकों की गाड़ियों के जाम में बुरी तरह से फंस जाता है। यहां के चारों प्रमुख मार्गों नैनीताल रोड, रामपुर रोड, बरेली रोड और कालाढूंगी रोड के अलावा शहर के चौराहों काठगोदाम और रानीबाग तक भयंकर जाम लग जाता है। काठगोदाम पार करने के बाद जब गाड़ियां पहाड़ चढ़ती हैं तो भीमताल तक पूरी चढ़ाई में सड़क गाड़ियों की कतार से पट जाती है। भीमताल शहर भी जाम से कराह उठता है और फिर भवाली और भवाली से कैंची धाम तक जाम किसी को भी निढाल करने को काफी है।
10 घंटे में तय हुई 50-55 किमी की दूरी
शनिवार 3 अक्टूबर को अल्मोड़ा की तरफ से आने वाले वाहनों को गरमपानी से कैंची होते हुए हलद्वानी पहुंचने में 10 घंटे तक का समय लगा। जबकि यह दूरी मात्र 50-55 किमी की है और आम दिनों में अगर ट्रैफिक न हो तो यह दूरी लगभग 2 घंटे में तय हो जाती है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते इस रूट से अपने गांव और शहर के बीच सफर करने वाले स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
