LPG Crisis in India: मिडिल ईस्ट में भड़की युद्ध की आग की आंच अब भारत की रसोई और रेस्तरां तक पहुंच गई है। ईरान-इजरायल के बीच चल रहे जंग के कारण ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख समुद्री रास्ते बाधित होने से देश के बड़े शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि बेंगलुरु, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों के होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर अगले दो दिनों में सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो वे अपने शटर गिराने पर मजबूर हो जाएंगे।
गैस की किल्लत से होटलों पर लटक सकता है ताला (सांकेतिक चित्र: PTI)
बेंगलुरु में मंगलवार से तालाबंदी की चेतावनी
बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि मंगलवार यानी आज से शहर के अधिकांश होटल बंद रह सकते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि तेल कंपनियों ने 70 दिनों के स्टॉक का भरोसा दिया था, लेकिन अचानक सप्लाई रुकना एक बड़े धोखे जैसा है। चूंकि होटल 'अनिवार्य सेवाओं' में आते हैं, इसलिए इनके बंद होने का सबसे बुरा असर उन सीनियर सिटिजन्स, छात्रों और मरीजों पर पड़ेगा जो पूरी तरह बाहर के खाने पर निर्भर हैं।
मुंबई में 'मेनू' से गायब हुए दाल मखनी और डोसा
सपनों के शहर मुंबई में संकट इतना गहरा है कि करीब 20% रेस्तरां ने पहले ही काम रोक दिया है। गैस बचाने के लिए कई नामी होटलों ने अपने मेनू छोटे कर दिए हैं। 'दाल मखनी' और 'रवा डोसा' जैसे खाने, जिन्हें पकने में लंबा समय और ज्यादा गैस लगती है, उन्हें फिलहाल मेनू से हटा दिया गया है। 'इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन' का कहना है कि अगर सप्लाई नहीं सुधरी तो दो दिन में 100% रेस्तरां चलने की स्थिति में नहीं रह पाएंगे।
'होर्मुज स्ट्रेट' और भारत की मजबूरी
गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 62% LPG आयात करता है। इसमें से 85-90% हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आता है, जिसका रास्ता 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण इस रास्ते में व्यवधान होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर हुआ है। सरकार ने फिलहाल घरों की रसोई को प्राथमिकता दी है, जिसका खामियाजा कमर्शियल सेक्टर को भुगतना पड़ रहा है।
कई संगठनों ने जताई चिंता
राष्ट्रीय स्तर के हॉस्पिटैलिटी संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। Federation of Hotel and Restaurant Associations of India ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को चिट्ठी लिखकर जमीनी स्तर पर हो रही व्यापक बाधाओं की ओर ध्यान दिलाया। एसोसिएशन ने कहा कि कई LPG डिस्ट्रिब्यूटर्स इस महीने की शुरुआत में जारी एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए आपूर्ति रोक रहे हैं। FHRAI के महासचिव Jaison Chacko ने सरकार से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं है और कमर्शियल LPG सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इसी तरह National Restaurant Association of India ने कहा कि सरकार के आश्वासन के बावजूद आपूर्तिकर्ता इंडस्ट्री की गैस आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कमर्शियल LPG आपूर्ति पर किसी आधिकारिक प्रतिबंध की घोषणा नहीं की गई है।
सरकार का 'एक्शन' और आवश्यक वस्तु अधिनियम
संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है ताकि गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकी जा सके। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं और अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस मुहैया कराई जा रही है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनता से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है और वैकल्पिक मार्गों से आयात की कोशिशें जारी हैं।
सियासत भी गरमाई
इस संकट पर राजनीति भी तेज है। पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इसे प्रधानमंत्री मोदी की साख बताया कि ईरान ने भारत के तीन तेल जहाजों को रास्ता दिया है। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे एक गंभीर समस्या बताते हुए बढ़ती कीमतों और कमी पर चिंता जताई है। फिलहाल, आम आदमी इस इंतजार में है कि कब वैश्विक तनाव कम होगा और उसकी थाली से 'युद्ध' का साया हटेगा।
