इस साल बना ‘यूनियन टेरिटरी’ चंडीगढ़, जानिए इस खूबसूरत सिटी की दिलचस्प कहानी

भारत की आजादी के बाद योजनाबद्ध ढंग से बसाया गया पहला शहर चंडीगढ़, आधुनिकता और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। “द सिटी ब्यूटीफुल” कहलाने वाला यह शहर अपनी सुव्यवस्थित संरचना, हरी-भरी सड़कों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। इसका डिजाइन प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बुजिए ने तैयार किया था, जिसने इसे वैश्विक स्तर पर एक आदर्श नगरी का दर्जा दिलाया। तो आइए जानते हैं इस शहर का रोचक इतिहास।

Chandigarh City History: चंडीगढ़, जिसे “द सिटी ब्यूटीफुल” कहा जाता है, अपनी अनोखी खूबसूरती और सुनियोजित संरचना के लिए पूरे देश में एक मिसाल माना जाता है। शहर की चौड़ी और साफ-सुथरी सड़कें, हर ओर फैली हरी-भरी पेड़ों की कतारें और शांत वातावरण इसे भारत के सबसे आकर्षक शहरी केंद्रों में शामिल करते हैं। यहां की वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता का संगम हर आगंतुक को अपनी ओर खींच लेता है। लेकिन चंडीगढ़ सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने इतिहास और निर्माण की अनोखी कहानी के लिए भी जाना जाता है। यह शहर भारत की आजादी के बाद योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया पहला शहर था। देश के विभाजन के बाद पंजाब को एक नई राजधानी की आवश्यकता थी, क्योंकि लाहौर पाकिस्तान का हिस्सा बन गया था। इसी जरूरत से जन्म हुआ “चंडीगढ़” का एक ऐसा शहर जो आधुनिकता और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक बना।

History and Origin of Chandigarh

चंडीगढ़ का इतिहास और इसकी उत्पत्ति

चंडीगढ़ का इतिहास और इसकी उत्पत्ति (फोटो: iStock)

हजारों साल पुराना क्षेत्र

चंडीगढ़ का क्षेत्र लगभग 8000 वर्ष पूर्व की हड़प्पा सभ्यता से जुड़ा माना जाता है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक यह इलाका विस्तृत और समृद्ध पंजाब प्रांत का हिस्सा रहा। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय इस क्षेत्र को पूर्वी और पश्चिमी पंजाब में बांट दिया गया। इसके बाद नई राजधानी की आवश्यकता महसूस हुई, ताकि न केवल पूर्वी पंजाब का प्रशासनिक केंद्र स्थापित किया जा सके, बल्कि पश्चिमी पंजाब से विस्थापित हुए हजारों शरणार्थियों को पुनर्वास भी मिल सके। मार्च 1948 में, पंजाब सरकार ने भारत सरकार के परामर्श से शिवालिक पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित क्षेत्र को नई राजधानी के रूप में चुना। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, जहां आज चंडीगढ़ बसा है, वह स्थान सन् 1892-93 के अंबाला जिला राजपत्र में तत्कालीन अंबाला जिले का हिस्सा बताया गया था। शहर की नींव 1952 में रखी गई, और यह स्वतंत्र भारत के आधुनिक नियोजित शहरों में से एक बना।

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