चंडीगढ़ : 'सतलुज' फिल्म को लेकर पंजाब की सियासत लगातार गरमाई हुई है। अब इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा फिल्म पर सवाल उठाए जाने के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ सिख नेताओं ने उनके रुख से असहमति जताई है। नेताओं का कहना है कि इस विषय पर बयान देते समय तथ्यों और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
सतलुज फिल्म पर BJP में दो फाड़
भाजपा नेता एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने रवनीत बिट्टू को सलाह दी कि वे इस मुद्दे पर सोच-समझकर बयान दें। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा द्वारा लापता युवाओं को लेकर दिए गए आंकड़ों का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सत्यापन किया था। यदि किसी को संदेह है तो वह आयोग के रिकॉर्ड का भी अध्ययन कर सकता है। लालपुरा ने कहा कि अतीत की घटनाओं से सीख लेना अधिक महत्वपूर्ण है।
पूर्व आईएएस अधिकारी और पंजाब भाजपा के महासचिव जगमोहन राजू ने भी फिल्म की स्क्रीनिंग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म पर प्रतिबंध लगाने या उसका विरोध करने से लोगों की उत्सुकता और बढ़ जाती है। उनके अनुसार, पंजाब ने इतिहास का एक बेहद दर्दनाक दौर देखा है और स्वाभाविक रूप से लोग उस समय की घटनाओं को समझना चाहते हैं।
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राजू ने कहा कि फिल्म के निर्माता का दावा है कि इसकी कहानी सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की कार्यवाही और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा के पूरे जीवन पर आधारित नहीं है, बल्कि उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण वर्षों को केंद्र में रखकर बनाई गई है। फिल्म देखने के अपने अनुभव साझा करते हुए राजू ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इससे पंजाब में कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा होगी। उनके अनुसार, पंजाब के लोग परिपक्व हैं और किसी फिल्म के कारण बड़े स्तर पर अशांति फैलने की आशंका नहीं है।
राज्यपाल को पत्र लिखकर आयोग गठित करने की मांग
रवनीत सिंह बिट्टू के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजू ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री के कुछ बयान देखे हैं, लेकिन उनकी बात पूरी तरह समझ नहीं आई। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास से जुड़े विवादों की सच्चाई फिल्मों के बजाय किसी स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग कमीशन के माध्यम से सामने आनी चाहिए। राजू ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में राज्यपाल को पत्र लिखकर आयोग गठित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में भी फैक्ट कमीशन बनाने का वादा किया था।
भाजपा नेता फतेहजंग सिंह बाजवा ने भी फिल्म पर संतुलित दृष्टिकोण रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि फिल्म में उन लोगों का जिक्र है जिनकी हत्या कर उनके शव परिवारों को नहीं सौंपे गए, लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद के दौर में लगभग 1,700 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता, जो एक राजनेता थे, वर्ष 1987 में आतंकवाद का शिकार हुए थे। इसके अलावा कई हिंदू नागरिक भी उस हिंसा में मारे गए थे।
बाजवा ने कहा कि पंजाब के उस दौर में हर समुदाय ने पीड़ा झेली थी। इसलिए इस विषय को राजनीतिक रंग देने के बजाय संवेदनशीलता से देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
अकाली दल द्वारा पंजाब में फिल्म की स्क्रीनिंग की पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए बाजवा ने कहा कि यदि अकाली दल फिल्म दिखाना चाहता है तो यह उसका फैसला है, लेकिन उसे अपने शासनकाल के दौरान हुए बेअदबी मामलों और नशे से जुड़े मुद्दों पर भी जवाब देना चाहिए।
गौरतलब है कि सोमवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 'सतलुज' फिल्म के निर्माता और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की मंशा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने फिल्म में बताए गए 25 हजार लापता लोगों के आंकड़े पर प्रमाण मांगे थे। साथ ही कहा था कि आतंकवाद के दौर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और हिंदू नागरिक भी मारे गए थे, जबकि फिल्म में केवल एक पक्ष को प्रमुखता से दिखाया गया है।
