अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन देखने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर चल रहे नियुक्तियों के 'खेल' और भाई-भतीजावाद पर अब कड़ा एक्शन लेने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट में भारी मात्रा में ऐसी नियुक्तियां की गई थीं जो महज सिफारिशों और रसूख के आधार पर थीं। नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों और करीबियों को मंदिर की व्यवस्थाओं में नौकरी पर रख लिया गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले अनिवार्य माना जाने वाला पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया था। मंदिर जैसी संवेदनशील जगह की सुरक्षा और शुचिता को देखते हुए अब ट्रस्ट इस पर सख्त रुख अपनाने जा रहा है।
गोपाल राव भी छोड़ सकते हैं ट्रस्ट (फाइल फोटो | PTI)
लापरवाह कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिफारिश के दम पर नौकरी पाने वाले ऐसे कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और कामकाज की अब नए सिरे से गहन समीक्षा की जाएगी। ट्रस्ट इसके लिए एक सख्त और नई गाइडलाइन जारी करने जा रहा है। इन सभी विवादित कर्मचारियों का सबसे पहले पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाएगा और इसके बाद एक विशेष 'स्क्रीनिंग' प्रक्रिया से उन्हें गुजरना होगा। इस स्क्रीनिंग के नतीजों के आधार पर अयोग्य और सिफारिशी कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की कवायद शुरू की जाएगी। आगामी 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की हाई-लेवल बैठक में इस कड़े प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाना तय माना जा रहा है।
गोपाल राव भी छोड़ सकते हैं ट्रस्ट
नियुक्तियों के विवाद के बीच ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व और आंतरिक संगठन में भी बहुत बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनिल मिश्रा और चम्पत राय पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। अब खबर है कि ट्रस्ट के एक और वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव भी जल्द ही मंदिर के कामकाज से खुद को पूरी तरह अलग कर सकते हैं।
संभावना जताई जा रही है कि 11 जुलाई को होने वाली बैठक में ट्रस्ट के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए जब नई व्यवस्था लागू की जाएगी, उससे पहले ही गोपाल राव स्वेच्छा से अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएंगे।
