महाशिवरात्रि के पर्व पर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संगरूर जिले के धूरी स्थित ऐतिहासिक श्री रणकेश्वर महादेव मंदिर (रणीके) में माथा टेका। दोनों नेताओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और पंजाब व देश की सुख-शांति, समृद्धि और आपसी भाईचारे के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उनके साथ मनीष सिसोदिया भी मौजूद रहे।
मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और भगवंत मान
प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत का संगम
रविवार को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए अरविंद केजरीवाल ने इस त्योहार को भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का आधार बताया। उन्होंने कहा कि महादेव की ऊर्जा मन को शांति और आत्मा को नई शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद हर नागरिक पर बना रहे और देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
महाभारत काल से जुड़ा है मंदिर का गौरवशाली इतिहास
रणकेश्वर महादेव मंदिर को मालवा क्षेत्र का एक अत्यंत प्रतिष्ठित सिद्ध पीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध महाभारत काल से है। कहा जाता है कि युद्ध से पहले पांडव पुत्र अर्जुन ने इसी स्थान पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। अर्जुन की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां प्रकट हुए थे और उन्हें दिव्य 'गांडीव धनुष' का वरदान दिया था। इसी पौराणिक महत्व के कारण इसे 'रणकेश्वर' के नाम से जाना जाता है।
विरासत को सहेजने के लिए पंजाब सरकार की वचनबद्धता
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मौके पर दोहराया कि उनकी सरकार पंजाब की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस से लेकर गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व तक, पंजाब अपनी गौरवशाली विरासत का सम्मान पूरी श्रद्धा के साथ करता है। मान ने बताया कि सरकार जल्द ही श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को ऐतिहासिक स्तर पर मनाने की तैयारी कर रही है।
धूरी के रणीके गांव में उमड़ा आस्था का सैलाब
महाशिवरात्रि के अवसर पर इस ऐतिहासिक मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। 'आप' नेताओं ने भी महादेव के दर्शन किए। अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने कहा कि महाशिवरात्रि हमें सत्य की खोज और आत्म-अनुशासन की प्रेरणा देती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे प्राचीन मंदिर केवल स्मारक नहीं, बल्कि हमारी जीवंत विरासत हैं जो समाज में एकता और सद्भावना का संदेश फैलाते हैं।
