बालिग बेटी को साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, हाईकोर्ट ने क्यों और किस मामले में नहीं मानी मां की बात?

Habeas Corpus Petition Adult Daughter Freedom: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए कहा कि बालिग बेटी अपनी इच्छा से रहने को स्वतंत्र है। माता-पिता उसे साथ रहने पर मजबूर नहीं कर सकते।

Allahabad High Court Adult Daughter Custody: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए कहा है कि माता-पिता अपनी वयस्क बेटी को उसकी इच्छा के खिलाफ अपने साथ रहने के लिए मजबूर करने के मकसद से ऐसी याचिका का इस्तेमाल नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने कलावती देवी नामक महिला द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए 28 सितंबर को यह टिप्पणी की।

बालिग बेटी को साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, हाईकोर्ट ने क्यों और किस मामले में नहीं मानी मां की बात?

बालिग बेटी को साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, हाईकोर्ट ने क्यों और किस मामले में नहीं मानी मां की बात? (प्रतीकात्मक फोटो- istock)

बताया गया कि कलावती ने अपनी 25 वर्षीय बेटी कुमारी पूजा को अदालत के समक्ष पेश किए जाने की मांग की थी। जिस पर अदालत ने कहा कि बेटी बालिग है और वह अपनी पसंद की जगह और व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है।

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