10 दिनों का मौसम: पश्चिमी विक्षोभ बढ़ाएगा टेंशन; इन राज्यों में बढ़ेगा सर्दी का कहर, पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

Agle 10 Din Ka Mausam: अगले 10 दिनों का मौसम (01 Feb to 10 Feb 2026), दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में अगले 10 दिनों का मौसम कैसा रहेगा? 10 दिनों में ठंड का मौसम (Next 10 Days IMD Weather Forecast): जनवरी की शुरुआत से ही उत्तर भारत और देश के अन्य हिस्सों में ठंड, शीतलहर, कोहरा और बारिश का जोरदार असर दिख रहा है। पूर्वी राज्यों में इस सर्दी मौसम में बारिश का पूरी तरह अभाव रहा है, जबकि पश्चिमी विक्षोभ और ट्रोपोस्फेरिक परिसंचरण मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले दिनों में पश्चिमी हिमालय और मैदानी इलाकों में बारिश, बर्फबारी और कोहरे जैसी परिस्थितियों की संभावना जताई गई है।

Agle 10 Din Ka Mausam: प्रचंड ठंड, शीतलहर, कोहरा और बारिश के संगम से लोगों का हाल बेहाल है। जनवरी की शुरुआत के साथ ही मौसम ने उत्तर भारत समेत देश के अन्य भागों में अपने जोरदार तेवर दिखाए। स्काईमेट की मौसम रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्दी के मौसम में देश के पूर्वी राज्यों में बारिश का पूरी तरह अभाव रहा है। मौसम प्रणालियों की बात करें तो, मौजूदा मौसम स्थितियों के अनुसार, उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों में निचले तथा मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, जो चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। इसके साथ ही ऊपरी ट्रोपोस्फियर में पछुआ हवाओं के बीच एक गर्त बना हुआ है, जिसका अक्ष समुद्र तल से लगभग 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 68° पूर्व देशांतर के आसपास और 30° उत्तरी अक्षांश के उत्तर की ओर स्थित है।

Agle 10 Din Ka Mausam

अगले 10 दिनों का मौसम

निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर दक्षिण हरियाणा और उससे लगे उत्तरी राजस्थान के ऊपर एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण विकसित हुआ है। इसी स्तर पर पश्चिमी मध्य प्रदेश से लेकर दक्षिण हरियाणा और आसपास के उत्तरी राजस्थान तक, गुजरात क्षेत्र को पार करता हुआ एक ट्रफ भी बना हुआ है। ऊपरी वायुमंडल में, समुद्र तल से करीब 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर लगभग 125 नॉट की तीव्र हवाओं वाली उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम पूर्वोत्तर भारत के ऊपर सक्रिय बनी हुई है। इसके अलावा, निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, लक्षद्वीप क्षेत्र और केरल तट के पास एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। वहीं, कोमोरिन क्षेत्र और उसके आसपास समुद्र तल से लगभग 1.5 किलोमीटर तक फैला एक और ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। आगे के पूर्वानुमान के अनुसार, 2 फरवरी 2026 की रात से हिमालयी क्षेत्रों के ऊंचाई वाले हिस्सों पर एक नया लेकिन कमजोर पश्चिमी विक्षोभ असर डाल सकता है। इसके बाद 5 फरवरी 2026 की रात से एक और पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है।

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