Hathras Gang Rape Murder Case: हाथरस सामूहिक दुष्कर्म कांड के चार साल बाद, पीड़िता के गांव में कैसा है चुनावी माहौल?

2020 Hathras Gang Rape Murder Case: हाथरस में दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म के बाद मौत के चार वर्ष बाद भी भूल गढ़ी गांव विकास की बाट जोह रहा है। यहां दलित बस्ती मूलभूत सुविधाओं के पहुंचने का रास्ता तक रही है। आइये जानते हैं नेताओं पर स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया क्या है?

2020 Hathras Gang Rape Murder Case: हाथरस के जिस भूल गढ़ी गांव में करीब चार साल पहले एक दलित किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी मौत की घटना ने पूरे देश को दहला दिया था। वह आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां रोजमर्रा के सन्नाटे में चुनाव की गूंज दूर तक सुनाई नहीं देती। साल 2020 में 19 वर्षीय युवती पर कथित तौर पर गांव के अपर कास्ट के युवकों ने क्रूरतापूर्वक हमला किया था और दो सप्ताह बाद दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने गांव में ठाकुरों और अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के बीच ध्रुवीकरण को बढ़ा दिया था।

विकास का रास्ता तक रहा भूल गढ़ी गांव

भूल गढ़ी तक ठीकठाक सड़क नहीं होने की वजह से लोगों को पैदल आना पड़ता है। इस छोटे से गांव में उच्च जाति (ठाकुरों) के करीब 90 परिवार और चार दलित परिवार रहते हैं। ये दलित परिवार अधिकतर गांव के ही उच्च जाति के लोगों के घरों में काम करते थे और आज भी कर रहे हैं। वे गांव के बाहर एक बस्ती में झोपड़ियों में रहते हैं। युवती से दुष्कर्म के आरोपी उच्च जाति के चार युवकों में से तीन के गांव में लौटने के बाद गांव में तनाव सा दिखता है। पीड़िता के परिवार के लोग ज्यादा कुछ नहीं बोलते और उनकी गतिविधियों पर सीसीटीवी से नजर रखी जाती है। भूल गढ़ी के निवासियों के लिए चार साल पहले घटी घटना कभी नहीं भूलने वाली है, लेकिन महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने उन्हें जल्द ही फिर से उसी रास्ते पर लौटा दिया, जहां सिर्फ जिंदगी जीने की फिक्र है।

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