लड़खड़ा चुकी है दुनिया की व्यवस्था, सहयोग से मुंह नहीं मोड़ सकते, बोलीं पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल

Dr Manmohan Singh Memorial Lecture: पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने बहुपक्षीय सहयोग की वकालत करते हुए कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मुंह मोड़ना संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिकी व्यापार नीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था पहले ही कमजोर हो चुकी है। मर्केल ने चेतावनी दी कि 'शक्ति के प्रभुत्व' वाली सोच के बजाय कानून आधारित वैश्विक व्यवस्था जरूरी है।

Dr Manmohan Singh Memorial Lecture: नई दिल्ली में आयोजित पहले 'डॉ. मनमोहन सिंह व्याख्यान' में जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने वैश्विक व्यवस्था पर गहरा मंथन किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब दुनिया संरक्षणवाद (Protective Trade Policies) की ओर भाग रही है, तब अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मुंह मोड़ना कोई विकल्प नहीं हो सकता। मर्केल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विरासत को याद करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया। यह व्याख्यान 'मनमोहन सिंह ट्रस्ट' द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉ. सिंह के विचारों और उनकी आर्थिक दूरदर्शिता को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम में डॉ. सिंह की पत्नी गुरशरण कौर, सोनिया गांधी, पी. चिदंबरम और एन.एन. वोहरा जैसी दिग्गज हस्तियां मौजूद थीं। मर्केल ने डॉ. सिंह के आर्थिक सुधारों को 'साहसिक' करार दिया और कहा कि उनके द्वारा दिखाए गए रास्ते आज भी प्रासंगिक हैं।

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'डॉ. मनमोहन सिंह व्याख्यान' में जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल (तस्वीर-PTI)

'वैश्विक बदलाव के दौर में जर्मनी और भारत'

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मर्केल ने अपने भाषण का विषय 'वैश्विक बदलाव के दौर में जर्मनी और भारत' रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, व्यापार शुल्क की राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव जैसी ट्रिपल चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने चिंता जताई कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पुरानी व्यवस्था अब खतरे में है।

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