Dr Manmohan Singh Memorial Lecture: नई दिल्ली में आयोजित पहले 'डॉ. मनमोहन सिंह व्याख्यान' में जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने वैश्विक व्यवस्था पर गहरा मंथन किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब दुनिया संरक्षणवाद (Protective Trade Policies) की ओर भाग रही है, तब अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मुंह मोड़ना कोई विकल्प नहीं हो सकता। मर्केल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विरासत को याद करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया। यह व्याख्यान 'मनमोहन सिंह ट्रस्ट' द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉ. सिंह के विचारों और उनकी आर्थिक दूरदर्शिता को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम में डॉ. सिंह की पत्नी गुरशरण कौर, सोनिया गांधी, पी. चिदंबरम और एन.एन. वोहरा जैसी दिग्गज हस्तियां मौजूद थीं। मर्केल ने डॉ. सिंह के आर्थिक सुधारों को 'साहसिक' करार दिया और कहा कि उनके द्वारा दिखाए गए रास्ते आज भी प्रासंगिक हैं।
'डॉ. मनमोहन सिंह व्याख्यान' में जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल (तस्वीर-PTI)
'वैश्विक बदलाव के दौर में जर्मनी और भारत'
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मर्केल ने अपने भाषण का विषय 'वैश्विक बदलाव के दौर में जर्मनी और भारत' रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, व्यापार शुल्क की राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव जैसी ट्रिपल चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने चिंता जताई कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पुरानी व्यवस्था अब खतरे में है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय अखंडता पर चोट
यूरोप की स्थिति पर चर्चा करते हुए मर्केल ने कहा कि रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी शांति व्यवस्था को हिला दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस हमले से किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के मूल सिद्धांत को गहरी चोट पहुंची है। यह केवल एक युद्ध नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
अमेरिकी नीतियों और 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली सोच पर प्रहार
- मर्केल ने अमेरिका की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों, विशेषकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा:
- संस्थाओं को कमजोर करना: अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और पेरिस जलवायु समझौते जैसे मंचों को कमजोर किया है।
- संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकिता: संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं और देश एकतरफा फैसले ले रहे हैं।
- शक्ति का प्रभुत्व: मर्केल ने चेतावनी दी कि सहयोग की जगह अब 'जिसकी ताकत, उसी का हक' (Might is Right) जैसी सोच ले रही है, जो कानून के शासन (Rule of Law) के लिए खतरा है।
एआई (AI) और सोशल मीडिया के लिए वैश्विक नियमों की मांग
भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए मर्केल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया के नियमन (Regulation) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर नई प्रौद्योगिकियों के लिए समय रहते साझा वैश्विक ढांचा तैयार नहीं किया गया, तो बहुपक्षीय व्यवस्था पूरी तरह जड़ या बेकार हो सकती है। अग्रणी देश अपने नियम खुद बना रहे हैं, जिससे दुनिया में असमानता बढ़ सकती है।
लोकतंत्र की असली परीक्षा: कागजों पर नहीं, जमीन पर
मर्केल ने 2005 में डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए भाषण को याद किया। डॉ. सिंह ने तब कहा था कि "लोकतंत्र की असली परीक्षा उसके संविधान की लिखावट से नहीं, बल्कि जमीन पर उसके क्रियान्वयन से होती है।" मर्केल ने देशों को आगाह किया कि उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय अधिकारों पर कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की उम्मीदें
भारत की तारीफ करते हुए मर्केल ने कहा कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में भारत ने लगातार 5% से अधिक की विकास दर हासिल की है। यह भारत की अद्भुत आर्थिक क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत और जर्मनी के बीच 'अंतर-सरकारी परामर्श' की शुरुआत भी उनके और डॉ. सिंह के साझा प्रयासों का परिणाम थी। मर्केल ने उम्मीद जताई कि इस तरह के आयोजन न केवल डॉ. सिंह के विचारों को जीवित रखेंगे, बल्कि भारत और जर्मनी के द्विपक्षीय संबंधों को भी नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। कार्यक्रम का समापन डॉ. सिंह की बेटियों, उपेंदर सिंह और दमन सिंह के संबोधन के साथ हुआ।
