Benefits of gold loan over selling gold: भारत में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आर्थिक संपत्ति भी माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों के ट्रेंड को देखें तो देखा जा सकता है कि जरूरत पड़ने पर लोग सोना बेचने के बजाय गोल्ड लोन लेना ज्यादा पसंद करते हैं। हाल के वर्षों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। UBS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास लगभग 28,000 टन सोना है, जिसकी कुल कीमत करीब 4.5 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है। यह भारत की पूरी नॉमिनल जीडीपी से भी ज्यादा है। आइए जानते हैं भारत में किन कारणों से पैसों की जरूरत के लिए गोल्ड लोन लेना पसंद किया जाता है-
गोल्ड लोन क्यों बनता है भारतीयों की पहली पसंद (Photo: iStock)
सोने से भावनात्मक लगाव
इस ट्रेंड का सबसे बड़ा कारण सोने से जुड़ा भावनात्मक लगाव होना है। भारतीय परिवारों में सोना अक्सर विरासत (heritage) के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलता है। इसलिए लोग इसे बेचना पसंद नहीं करते, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसके बदले लोन लेना बेहतर समझते हैं।
जल्दी पैसा मिलना
सोना बेचने के बजाय गोल्ड लोन लेने की वजह जल्दी पैसा मिलना भी है। गोल्ड लोन एक सिक्योर्ड लोन होता है, जिसमें सोना गिरवी रखा जाता है। इस वजह से बैंक या NBFC कम समय में, कई बार कुछ घंटों में ही लोन दे दे देते हैं।
कम ब्याज दर
गोल्ड लोन पर कम ब्याज दर भी ग्राहकों को लुभाती है। क्योंकि यह लोन सोने के बदले दिया जाता है, इसलिए यह पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन की तुलना में सस्ता होता है। यही वजह है कि लोग इसे ज्यादा किफायती विकल्प मानते हैं।
सोने की मालिकाना हक
गोल्ड लोन का एक बड़ा फायदा यह है कि सोने की मालिकाना हक (ownership) आपके पास ही रहता है।अगर आप सोना बेच देते हैं, तो वह हमेशा के लिए चला जाता है। लेकिन गोल्ड लोन में आप पैसा चुकाकर अपना सोना वापस पा सकते हैं।
शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए इस्तेमाल
गोल्ड लोन को लोग शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल करते हैं, जैसे मेडिकल खर्च, बिजनेस कैश फ्लो या इमरजेंसी। यह एक ऐसा विकल्प है, जिसमें आप अपनी संपत्ति को बेचे बिना उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
कीमतों में लगातार बढ़ोतरी
सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भी इस ट्रेंड एक मुख्य कारण है। जब सोने का दाम बढ़ता है, तो उसी सोने के बदले ज्यादा लोन मिल सकता है, जिससे यह विकल्प और आकर्षक बन जाता है।
