प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में सोमवार को तेज दबाव देखने को मिला। IDFC First Bank के शेयर में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट के साथ लोअर सर्किट लग गया, जबकि AU Small Finance Bank के शेयर भी 6 प्रतिशत से ज्यादा फिसल गए। गिरावट की वजह हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में 590 करोड़ रुपये की कथित फ्रॉड का खुलासा है, जिसने निवेशकों का भरोसा झटका है।
दोनों कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट
क्या है मामला
IDFC First Bank ने चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार से संबंधित खातों में करीब 590 करोड़ रुपये की अनियमितता की जानकारी दी है। प्रारंभिक आकलन में इसे फ्रॉड की श्रेणी में रखा गया है। मामले के सामने आते ही बाजार में घबराहट बढ़ी और शेयर में भारी बिकवाली शुरू हो गई।
वहीं, हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज के लिए डी-एम्पैनल कर दिया है। राज्य के विभागों, बोर्ड और पीएसयू को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन बैंकों में रखी राशि को स्थानांतरित करें और खातों का मिलान तय समयसीमा में पूरा करें। इस कदम ने सेंटिमेंट को और कमजोर किया।
शेयरों पर कितना असर
IDFC First Bank का शेयर 83.51 रुपये के पिछले बंद भाव से टूटकर करीब 67 रुपये तक आ गया और लोअर सर्किट में फंस गया। इंट्राडे में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं AU Small Finance Bank का शेयर 1,029.65 रुपये के पिछले क्लोज से गिरकर 960 रुपये के आसपास ट्रेड करता दिखा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रॉड से जुड़ी खबरें बैंकिंग शेयरों में भरोसे को तुरंत प्रभावित करती हैं, क्योंकि यह गवर्नेंस और इंटरनल कंट्रोल से जुड़े सवाल खड़े करती हैं।
ब्रोकरेज की राय
कुछ ब्रोकरेज हाउस ने हालांकि नुकसान को ऑपरेशनल लॉस करार देते हुए कहा है कि इससे बैंक की पूंजी स्थिति या दीर्घकालिक फंडामेंटल्स पर बड़ा असर नहीं पड़ सकता। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक 29 में से 18 एनालिस्ट ने ‘बाय’, 6 ने ‘होल्ड’ और 5 ने ‘सेल’ रेटिंग दी है। 12 महीने का औसत टारगेट प्राइस मौजूदा स्तर से करीब 8 प्रतिशत अपसाइड का संकेत देता है।
लंबी अवधि का ट्रैक रिकॉर्ड
पिछले एक साल में IDFC First Bank ने करीब 17 प्रतिशत रिटर्न दिया है। तीन साल में 32 प्रतिशत और पांच साल में 15 प्रतिशत का रिटर्न रहा है। हालांकि यह प्रदर्शन बैंकिंग इंडेक्स से कमजोर रहा है। फिलहाल बाजार की नजर इस पर रहेगी कि बैंक इस मामले में रिकवरी और आंतरिक नियंत्रण मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाता है। शॉर्ट टर्म में शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जबकि दीर्घकालिक निवेशक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर सकते हैं।
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