हाल ही में मार्केट रेगुलेटर सेबी ने डिजिटल गोल्ड को लेकर निवेशकों को बड़ी चेतावनी दी है। सेबी ने कहा कि डिजिटल गोल्ड धोखा है, सेबी ने ऐसे निवेशकों को सख्त चेतावनी दी है कि डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड जैसे प्रोडक्ट किसी भी सरकारी या सेबी रेगुलेशन के तहत नहीं आते। इसका मतलब ये है कि अगर किसी कंपनी ने निवेशकों का पैसा लौटाने से इनकार कर दिया या प्लेटफॉर्म बंद हो गया, तो निवेशकों को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी। सेबी की चेतावनी के बाद से ही निवेशकों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि क्या डिजिटल गोल्ड और Gold ETF एक ही हैं? तो आइए आपको बताते हैं कि दोनों में क्या अंतर है?
दरअसल, आजकल लोग डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF में जमकर निवेश बढ़ा रहे हैं ऐसे में इनके बीच में अंतर जानना बहुत ही जरुरी हो गया है। आज के समय में सोना सिर्फ गहनों या सिक्कों के रूप में नहीं, बल्कि निवेश के डिजिटल और फाइनेंशियल विकल्पों के रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। तीनों ही विकल्पों से आप सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव का फायदा उठा सकते हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका, रिटर्न और जोखिम अलग-अलग होते हैं।
क्या है डिजिटल गोल्ड?
डिजिटल सोना एक ऐसा निवेश विकल्प है जिसे आप पूरी तरह ऑनलाइन खरीद सकते हैं। इसमें आपको फिजिकल सोना रखने या उसकी सुरक्षा की चिंता करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि खरीदा गया सोना आपके नाम पर सुरक्षित और इंश्योर्ड वॉल्ट में रखा जाता है। बस आपके पास इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग की सुविधा होनी चाहिए, जिससे आप कभी भी और कहीं से भी आसानी से निवेश कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई न्यूनतम निवेश सीमा नहीं होती आप चाहें तो ₹100 से भी कम रकम से शुरुआत कर सकते हैं।
₹1 से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। जैसे ही आप पैसा लगाते हैं, उतनी मात्रा का सोना आपके नाम पर एक सेफ वॉल्ट में रखा जाता है। बाद में आप चाहें तो इसे बेच सकते हैं या फिजिकल गोल्ड के रूप में मंगवा सकते हैं। हालांकि, यह तरीका सेबी (SEBI) के नियमन के तहत नहीं आता, इसलिए इसमें जोखिम भी ज्यादा है। अगर कंपनी या प्लेटफॉर्म डिफॉल्ट करता है, तो निवेशक को नुकसान हो सकता है।
गोल्ड ETF क्या है?
वहीं गोल्ड ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) एक रेगुलेटेड और सुरक्षित विकल्प है। यह सीधे सोने की कीमत को ट्रैक करता है और शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होता है। इसमें निवेश करने के लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत होती है। इसका फायदा यह है कि इसमें फिजिकल गोल्ड की स्टोरेज की झंझट नहीं होती और रीयल टाइम में खरीद-बिक्री की जा सकती है। हालांकि, इसमें ब्रोकरेज चार्ज देना पड़ता है और मार्केट की समझ जरूरी होती है।
गोल्ड बॉन्ड क्या है?
तीसरा विकल्प है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB), जो भारत सरकार और आरबीआई द्वारा जारी किए जाते हैं। इसमें फिजिकल सोना नहीं मिलता, बल्कि आपको एक प्रमाणपत्र (certificate) दिया जाता है। इस पर हर साल 2.5% ब्याज भी मिलता है और सोने की कीमत बढ़ने पर पूंजीगत लाभ भी होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह सुरक्षित और टैक्स बेनिफिट वाला निवेश है। हालांकि, इसका लॉक-इन पीरियड लंबा होता है कम से कम 5 साल तक निवेश निकालना आसान नहीं होता।
