Car Loan Tips: आज के समय में कार लोन (Car Loan) लेना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। कम डाउन पेमेंट, लंबा ईएमआई टेन्योर और इंस्टेंट फाइनेंसिंग ऑप्शन की वजह से लोग आसानी से नई कार खरीद लेते हैं। हालांकि कई बार बिना सही फाइनेंशियल प्लानिंग के लिया गया कार लोन बाद में तनाव का कारण बन सकता है। आपके साथ ऐसा न हो, इसके लिए 20/4/10 रूल अपनाने की सलाह दी जाती है। यह बजटिंग फॉर्मूला क्या है और कार खरीदते समय कैसे फाइनेंशियल डिसिप्लिन बनाए रखने में मदद कर सकता है, आइए जानते हैं-
Car Loan (Photo: iStock)
20/4/10 नियम क्या है
Car Loan (Photo: iStock)
डाउन पेमेंट
20/4/10 नियम तीन हिस्सों में काम करता है। कार खरीदते समय पहला 20 प्रतिशत हिस्सा आपकी डाउन पेमेंट से जुड़ा है। नियम के मुताबित, आपको 20 प्रतिशत डाउन पेमेंट करनी चाहिए। इससे लोन अमाउंट कम हो जाता है और ब्याज का बोझ भी घटता है।
कार लोन की अवधि
इसके बाद दूसरा हिस्सा कार लोन की अवधि को दिखाता है। नियम के अनुसार, आपका कार लोन 4 साल से ज्यादा अवधि का नहीं होना चाहिए। लंबी अवधि का लोन लेने पर EMI भले कम हो जाए, लेकिन कुल ब्याज काफी बढ़ सकता है।
कार से जुड़े खर्च
इसके बाद तीसरा हिस्सा कार से जुड़े खर्च को दिखाता है। नियम के अनुसार, आपकी मंथली इनकम का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कार से जुड़े खर्च पर नहीं जाना चाहिए। इसमें EMI के साथ fuel, insurance और maintenance cost भी शामिल होती है।
डाउन पेमेंट, टेन्योर और खर्च को समझें
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कम डाउन पेमेंट करने के कई लोग जरूरत से ज्यादा बड़ा लोन ले लेते हैं। इससे मंथली बजट पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं 20 प्रतिशत तक पेमेंट करने से व्यक्ति को वित्तीय सहारा मिलता है और ईएमआई को मैनेज करना भी आसान हो जाता है।
वहीं, बहुत से लोगों को लंबा लोन टेन्योर शुरुआत में आकर्षक लगता है क्योंकि EMI कम दिखाई देती है। लेकिन लंबे समय तक EMI भरने से कुल रिपेमेंट काफी ज्यादा हो जाता है। यही वजह है कि एक्सपर्ट शॉर्ट टेन्योर को बेहतर मानते हैं। इससे व्यक्ति जल्दी डेट-फ्री हो सकता है और इंटरेस्ट-कॉस्ट कम रहती है।
इसके अलावा 10 प्रतिशत इनकम रूल भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। कई लोग केवल EMI देखकर कार खरीद लेते हैं, जबकि कार ऑनरसिप में कई अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। Fuel prices, periodic servicing, insurance renewal और unexpected repair cost मंथली बजट को प्रभावित कर सकते हैं। अगर कार से जुड़े खर्च इनकम के बड़े हिस्से को कंज्यूम करने लगें तो सेविंग्स और निवेश पर असर पड़ सकता है।
कार खरीदते समय केवल लाइफस्टाइल या सोशल प्रेशर को ध्यान में नहीं रखना चाहिए। व्यक्ति को अपनी salary, existing loans, family responsibilities और future financial goals को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है। जरूरत से ज्यादा महंगी कार लेने से लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग प्रभावित हो सकती है।
