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क्या है 'ऑरेंज इकोनॉमी' जिसकी बजट भाषण में वित्त मंत्री ने की चर्चा, सरकार क्यों कह रही इसे ग्रोथ इंजन?

बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को भारत के भविष्य के बड़े ग्रोथ इंजन के रूप में सामने रखा। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि ऑरेंज इकोनॉमी क्या है और यह भारत की अर्थव्यवस्था को किस तरह नई दिशा दे सकती है।

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Photo : Times Now Digital
ऑरेंज इकोनॉमी का फायदा किसे?

What is Orange Economy? बजट 2026 के भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ऐसे सेक्टर का जिक्र किया जिसे अब तक भारत में मुख्यधारा की आर्थिक चर्चा में कम जगह मिलती रही थी। यह सेक्टर है ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ यानी क्रिएटिव और सांस्कृतिक उद्योगों की अर्थव्यवस्था। सरकार का मानना है कि एनीमेशन, गेमिंग, डिजाइन, डिजिटल कंटेंट, सांस्कृतिक पर्यटन और रचनात्मक उद्योग आने वाले वर्षों में रोजगार और निर्यात के बड़े स्रोत बन सकते हैं। सवाल यह है कि आखिर ऑरेंज इकोनॉमी क्या है, सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है।

ऑरेंज इकोनॉमी आखिर है क्या?

ऑरेंज इकोनॉमी उन उद्योगों और सेवाओं को कहा जाता है जिनकी नींव रचनात्मकता, कला, संस्कृति और बौद्धिक संपदा पर टिकी होती है। इसमें फिल्म, म्यूजिक, गेमिंग, एनीमेशन, डिजिटल कंटेंट, फैशन, डिजाइन, थिएटर, कला, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक आयोजन और पर्यटन से जुड़े कई उद्योग शामिल होते हैं। इस कॉन्सेप्ट को पहली बार 2013 में कोलंबिया के नेताओं ने लोकप्रिय बनाया। उनका कहना था कि जब विचारों को सांस्कृतिक उत्पाद और सेवाओं में बदला जाता है और उनकी आर्थिक कीमत बौद्धिक संपदा के आधार पर तय होती है, वही ऑरेंज इकोनॉमी है। ऑरेंज रंग को संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतीक मानते हुए इस क्षेत्र को यह नाम दिया गया।

बजट किन घोषणाओं से इसकी छाप

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में विशेष रूप से AVGC यानी Animation, Visual Effects, Gaming और Comics सेक्टर को भविष्य का बड़ा रोजगार क्षेत्र बताया। सरकार का अनुमान है कि 2030 तक इस उद्योग में करीब 20 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की जरूरत होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने देशभर के हजारों स्कूलों और सैकड़ों कॉलेजों में कंटेंट क्रिएशन और AVGC लैब स्थापित करने की घोषणा की है, ताकि छात्रों को शुरुआती स्तर से ही आधुनिक डिजिटल और क्रिएटिव तकनीकों का प्रशिक्षण मिल सके। इसके अलावा डिजाइन उद्योग में विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए पूर्वी भारत में नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही सरकार ने कई ऐतिहासिक स्थलों को आधुनिक सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी सामने रखी है, जहां डिजिटल स्टोरीटेलिंग, इंटरैक्टिव अनुभव और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए पर्यटकों को नया अनुभव दिया जाएगा।

सेक्टर / योजनाबजट 2026 घोषणाआवंटित राशि (अनुमानित/घोषित)उद्देश्य
AVGC (Animation, VFX, Gaming, Comics) कंटेंट क्रिएटर लैबदेशभर के 15,000 स्कूल और 500 कॉलेजों में AVGC लैब स्थापित करना₹250 करोड़गेमिंग, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट के लिए स्किल डेवलपमेंट
Indian Institute of Creative Technologies (मुंबई)AVGC प्रशिक्षण और कंटेंट निर्माण इकोसिस्टम को सपोर्टउपरोक्त फंड में शामिलक्रिएटिव टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग और कंटेंट प्रोडक्शन को बढ़ावा
डिजिटल क्रिएटर और क्रिएटिव इकोसिस्टम सपोर्टगेमिंग, डिजिटल कंटेंट और क्रिएटिव सेक्टर को व्यापक समर्थनलगभग ₹1.4 लाख करोड़ (विस्तृत विभाजन लंबित)डिजिटल क्रिएटर, मीडिया और क्रिएटिव उद्योग को बढ़ावा
नया National Institute of Design (पूर्वी भारत)डिजाइन शिक्षा और रिसर्च के लिए नया संस्थानराशि का विस्तृत विवरण लंबितडिजाइन सेक्टर में स्किल और विशेषज्ञों की कमी दूर करना
सांस्कृतिक व पुरातात्विक पर्यटन विकास15 ऐतिहासिक स्थलों को सांस्कृतिक पर्यटन हब के रूप में विकसित करनाराशि अलग-अलग योजनाओं में शामिलसांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

भारत का क्रिएटिव सेक्टर कितना बड़ा

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2024 में भारत का गेमिंग उद्योग करीब 23 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है, जबकि एनीमेशन और VFX सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। लाइव एंटरटेनमेंट और सांस्कृतिक आयोजनों का बाजार भी लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा फायदा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत की क्रिएटिव इंडस्ट्री का आकार अब करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और यह देश की कार्यशील आबादी के बड़े हिस्से को रोजगार दे रही है। पिछले वर्षों में रचनात्मक सेवाओं और कंटेंट के निर्यात में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ रही है।

सरकार का फोकस क्यों बदल रहा

अब तक औद्योगिक विकास की चर्चा मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आईटी सेक्टर के इर्दगिर्द घूमती रही है। लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ओटीटी के दौर में कंटेंट और क्रिएटिव इंडस्ट्री तेजी से बड़े आर्थिक सेक्टर में बदल रही है। गेमिंग, डिजिटल डिजाइन, एनीमेशन और कंटेंट प्रोडक्शन में कम निवेश से भी बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा किया जा सकता है। यही वजह है कि सरकार अब इस सेक्टर को रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देख रही है।

Oragne Economy at Glance.

एक नजर में ऑरेंज इकोनॉमी

किसे मिलेगा फायदा

जब किसी ऐतिहासिक स्थल या सांस्कृतिक आयोजन को बड़े स्तर पर विकसित किया जाता है, तो उसका फायदा सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहता। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, कला और हस्तशिल्प से जुड़े हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलता है। भारत के कई बड़े सांस्कृतिक आयोजनों ने यह साबित किया है कि कुछ ही दिनों में स्थानीय अर्थव्यवस्था में करोड़ों रुपये का प्रवाह हो सकता है। सरकार अब इसी मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करना चाहती है।

क्या चुनौतियां भी मौजूद हैं?

हालांकि उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ घोषणा से बदलाव नहीं आएगा। आयोजनों और प्रोडक्शन गतिविधियों के लिए परमिशन और क्लीयरेंस की जटिल प्रक्रिया अब भी बड़ी चुनौती है। लंबे समय से सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम की मांग की जा रही है ताकि आयोजन और प्रोडक्शन तेजी से हो सकें। इसके अलावा प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। नए संस्थानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से यह कमी धीरे-धीरे दूर हो सकती है।

आगे की तस्वीर कैसी दिखती है

अगर सरकार कौशल विकास, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश प्रोत्साहन पर लगातार ध्यान देती है, तो भारत वैश्विक कंटेंट और क्रिएटिव सर्विसेज बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। आने वाले वर्षों में एनीमेशन, गेमिंग, डिजाइन और डिजिटल कंटेंट सेक्टर नए स्टार्टअप, रोजगार और निर्यात अवसरों के बड़े स्रोत बन सकते हैं। यानी बजट 2026 में ऑरेंज इकोनॉमी पर जोर सिर्फ एक नई शब्दावली नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक रणनीति में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जहां रचनात्मकता को भी अब विकास का प्रमुख इंजन समझा जा रहा है।

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