जब आप किसी बैंक से लोन लेते हैं, तो बैंक आपकी ईएमआई (EMI) के ब्याज के जरिए लंबी अवधि तक कमाई करने का गणित बिठाता है। लेकिन जब आप अचानक पूरा पैसा एक साथ देकर लोन बंद कर देते हैं, तो बैंक को भविष्य में मिलने वाले ब्याज का तगड़ा नुकसान होता है। इसी नुकसान की भरपाई करने के लिए बैंक आपसे एक पेनाल्टी या जुर्माना वसूलते हैं, जिसे 'प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज' कहा जाता है। यह चार्ज आपके बचे हुए लोन की मूल राशि (Outstanding Principal) पर 2% से लेकर 5% तक हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका ₹5 लाख का लोन बचा है और बैंक 4% फोरक्लोजर चार्ज लेता है, तो आपको लोन बंद करने के लिए ₹20,000 अतिरिक्त चुकाने होंगे।
कहां चार्ज लगेगा और कहां नहीं?
आम जनता को बैंकों की इस मनमानी से बचाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बेहद सख्त और स्पष्ट नियम बनाए हैं।
- फ्लोटिंग ब्याज दर (Floating Interest Rate): अगर आपने 'फ्लोटिंग रेट' (बदलती ब्याज दर) पर होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन लिया है, तो आरबीआई के नियमानुसार बैंक आपसे ₹1 भी प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं वसूल सकते। यह पूरी तरह फ्री होता है।
- फिक्स्ड ब्याज दर (Fixed Interest Rate): अगर आपका लोन 'फिक्स्ड रेट' (तय ब्याज दर) पर है, तो बैंक आपसे प्रीपेमेंट चार्ज ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए भी शर्त है कि पैसा आपके अपने निजी स्रोतों (Own Funds) से होना चाहिए, न कि किसी दूसरे बैंक से लोन ट्रांसफर (Refinance) कराकर।
- बिजनेस लोन (Business Loans): व्यावसायिक या बिजनेस लोन पर आरबीआई के ये नियम पूरी तरह लागू नहीं होते, वहां बैंक अपनी पॉलिसी के हिसाब से चार्ज वसूल सकते हैं।
आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) पर क्या पड़ता है असर?
ज्यादातर लोगों को लगता है कि समय से पहले लोन चुकाने से उनका क्रेडिट या सिबिल स्कोर रॉकेट की तरह बढ़ जाएगा, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। जब आप लोन को मैच्योरिटी अवधि से बहुत पहले बंद कर देते हैं, तो शॉर्ट टर्म में आपका सिबिल स्कोर थोड़ा सा कम हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बैंक आपके 'क्रेडिट मिक्स' (लोन के प्रकारों का संतुलन) और आपके लंबे समय तक समय पर भुगतान करने के व्यवहार (Repayment Track Record) को देखना पसंद करते हैं। लोन जल्दी बंद होने से वह एक्टिव अकाउंट बंद हो जाता है। हालांकि, लंबे समय के नजरिए से देखा जाए तो आपके ऊपर से कर्ज का बोझ खत्म होना आपकी वित्तीय सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, और समय के साथ सिबिल स्कोर फिर से सुधर जाता है।
लोन बंद करने से पहले इन 3 बातों पर जरूर ध्यान दें
- किसी भी लोन के शुरुआती सालों में ईएमआई के अंदर 'ब्याज का हिस्सा' बहुत ज्यादा होता है और 'मूलधन' (Principal) कम। अगर आपका लोन आधा या उससे ज्यादा समय पूरा कर चुका है, तो आप पहले ही बैंक को मोटा ब्याज दे चुके होते हैं। ऐसे में आखिरी सालों में प्रीपेमेंट करने का कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होता, क्योंकि तब आपकी ईएमआई से सिर्फ मूलधन कट रहा होता है।
- मान लीजिए आपके पर्सनल लोन की ब्याज दर 12% है और आपके पास जो अतिरिक्त पैसा आया है, उसे अगर आप म्यूचुअल फंड या किसी अच्छी स्कीम में निवेश करते हैं जहां आपको 15% का रिटर्न मिल सकता है, तो लोन बंद करने के बजाय उस पैसे को निवेश करना ज्यादा समझदारी है। लेकिन अगर लोन का ब्याज ज्यादा है और निवेश का रिटर्न कम, तो लोन बंद करना ही बेहतर है।
- कई बैंक लोन एग्रीमेंट में 6 महीने या 1 साल का 'लॉक-इन पीरियड' रखते हैं। इसका मतलब है कि लोन लेने के शुरुआती कुछ महीनों तक आप चाहकर भी उसे बंद नहीं कर सकते। इसलिए प्रीपेमेंट की अर्जी देने से पहले अपने लोन एग्रीमेंट के नियमों को ध्यान से पढ़ लें।
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