Indian Railway से सफर करने वाले हर यात्री का कभी न कभी 'वेटिंग टिकट' (Waiting Ticket) से पाला जरूर पड़ा होगा। ट्रेन का सफर तय हो चुका हो, सामान पैक हो और टिकट पर स्टेटस '65 वेटिंग' दिख रहा हो, तो मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या यह टिकट कन्फर्म होगी या नहीं? सफर के दिन तक सीट पक्की होगी या चार्ट बनने के बाद टिकट कैंसिल हो जाएगी, यह चिंता हर यात्री को सताती है। असल में, 65 वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं, यह सिर्फ एक नंबर पर निर्भर नहीं करता। इसके पीछे ट्रेन का रूट, वेटिंग का प्रकार और यात्रा का दिन जैसे कई जरूरी कारण होते हैं।
वेटिंग लिस्ट का प्रकार सबसे ज्यादा जरूरी
अगर आपकी टिकट पर 65 वेटिंग है, तो सबसे पहले यह देखें कि वह किस कैटेगरी की वेटिंग है। भारतीय रेलवे में कई तरह की वेटिंग लिस्ट होती है। अगर आपकी टिकट GNWL (General Waiting List) है, तो आपके कन्फर्म होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं। जनरल वेटिंग लिस्ट तब मिलती है जब आप ट्रेन के शुरू होने वाले स्टेशन से आखिरी स्टेशन तक की यात्रा करते हैं।
इसके विपरीत, अगर आपकी टिकट पर PQWL (Pooled Quota Waiting List) या RLWL (Remote Location Waiting List) लिखा है, तो 65 का नंबर काफी बड़ा माना जाता है। रिमोट लोकेशन और पूल्ड कोटा में सीटें बहुत कम होती हैं, इसलिए इनमें 65 वेटिंग का कन्फर्म होना बहुत मुश्किल होता है।
ट्रेन का रूट और क्लास भी डालते हैं असर
65 वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने में इस बात का बड़ा हाथ होता है कि आप किस क्लास (Class) में सफर कर रहे हैं। अगर यह 65 वेटिंग स्लीपर क्लास (Sleeper Class) में है, तो इसके कन्फर्म होने की उम्मीद काफी ज्यादा होती है, क्योंकि स्लीपर में कोच ज्यादा होते हैं और लोग अक्सर आखिरी समय पर टिकट कैंसिल कराते हैं। वहीं, अगर 65 वेटिंग थर्ड एसी (3AC) या सेकेंड एसी (2AC) में है, तो संभावना बहुत कम हो जाती है क्योंकि एसी कोच में सीटें सीमित होती हैं। इसके अलावा, अगर ट्रेन दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-पटना जैसे बहुत ज्यादा भीड़भाड़ वाले रूट की है, तो त्योहारों के दिनों में 65 वेटिंग का क्लियर होना नामुमकिन के बराबर होता है, जबकि आम दिनों में यह आसानी से कन्फर्म हो सकती है।
चार्ट बनने और वीआईपी कोटा का खेल
ट्रेन खुलने से ठीक 7 घंटे पहले रेलवे का पहला 'रिजर्वेशन चार्ट' (Reservation Chart) तैयार होता है। इस दौरान रेलवे के पास उपलब्ध खाली सीटें, कैंसिल हुई टिकटें और वीआईपी कोटा (Emergency Quota) की बची हुई सीटें वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को आवंटित की जाती हैं। यदि ट्रेन में कोई बड़ा ग्रुप अपनी बुकिंग कैंसिल कराता है, तो वेटिंग लिस्ट बहुत तेजी से नीचे गिरती है। कभी-कभी रेलवे भीड़ को देखते हुए ट्रेन में अतिरिक्त कोच (Extra Coach) भी जोड़ देता है। अगर आपकी 65 वेटिंग वाली ट्रेन में एक भी एक्स्ट्रा कोच जोड़ दिया गया, तो आपकी टिकट तुरंत कन्फर्म या कम से कम आरएसी (RAC) तक पहुंच सकती है।
